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दिवाली : गांव VERSUS शहर की दीपावली

दिवाली का त्यौहार दिए की दीपक से हुयी रोशनी का त्यौहार है। इसे दीपावली भी इसीलिए बुलाते हैं क्यों क्यूंकि इसी दिन मिट्टी के दिया से घर-आँगन को रोशनी से प्रज्ज्वलित करते हैं और घर में श्री गणेश - लक्ष्मी की आराधना और पूजा अर्चना करते हैं।  हिन्दु मान्यताओं के अनुसार दिवाली के शुभ दिन के सुअवसर पर घर या दुकान में गणेश-लक्ष्मी की स्थापना और पूजा की जाती हैं। और मनोकामना की जाती है के बुद्धिमान गणेश और धनवान माता लक्ष्मी यूँ ही पुरे साल घर में उसी स्थान पर विराजे रहे जहाँ उनकी पूजा इस दिवाली में की गयी है।

दीपावली या दिवाली का त्योहार जगमगाती रोशनी और धूम-धाम करते हुए पटाखों का दिन है. अनेको तरह के पटाखे जलाये जाते है जो जलने के बाद भी धुआं छोड़ते रहते हैं। 

आज मैं आपके सामने देश के विभिन्न भागों में दिवाली मनाने के अलग-अलग ढंग को पेश करूँगा जो की मैंने पिछले कुछ सालों से तस्वीरों में संजो कर रखा हुआ था ताकि आज आपके सामने ला सकूँ। 

सही मायने में दिवाली ही एक ऐसा पर्व है जिसे धूम-धाम से मनाया जाता है।  मैं उस धूम-धाम की बात कर रहा हूँ जो पटाखे की आवाज़ से होती है। वैसे पटाखोँ और जगमगाती रोशनी के अलावा दिवाली देश के विभिन्न जगहों पर विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। दिवाली के समय मेरे गांव में लक्ष्मी - गणेश की पूजा होती है तो वही मेरे शहर की गलियों में माँ काली का आवाहन किया जाता है।

गावं में दिवाली कैसे मनाते हैं versus शहर में दिवाली कैसे मनाई जाती है ?

मैं जो इस ब्लॉग में प्रकाशित करने जा रहा हूँ वो घर के अंदर मनाई जाने वाली दीपावली नहीं है बल्कि सामाजिक पूजा पंडाल और मंडपों में मनाई जाने वाली दिवाली की झलकियां हैं। गावं में मनाई गयी दीपावली की तस्वीरें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गाओं की हैं और वहीँ शहर में मनाई गयी दिवाली पश्चिम बंगाल के हावड़ा शहर की।

दिन तो दिवाली का ही है पर दोनों जगहों के तौर-तरीके अलग हैं। चलिए, श्री गणेश करते हैं।

गांव की दीपवाली


दिवाली के पहले गांव के चौराहों पर सजी पटाखों और गणेश लक्ष्मी के मुर्तीयों की दुकानें

दिवाली उत्सव के तैयारी के लिए उमड़ती हुयी भीड़ देहात के बाज़ारों में देखते बनती है 

दिवाली में बनाये हुए पूजा मंडप को रंगोली से सजाते हुए गांव के लड़के

गांव में दिवाली के पूजा मंडप में श्री गणेश - विष्णु - लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियां 

पड़ोस के गांव में सजे पूजा मंडप में श्री गणेश - लक्ष्मी - विष्णु और सरस्वती की थीम मूर्तियां 

दिवाली में पूजन के लिए घर पर बिना किसी प्रशिक्षण के लड़कों द्वारा बनाया हुआ लक्ष्मी जी की मूर्ति 

पूरा गांव एक साथ दिवाली के बाद विसर्जन में DJ की धुन पर युवाओं को नाचते - थिरकते देखने के लिए जुटते हुए  

DJ वाले बाबू इनका गाना बजा दो - आज लक्ष्मी गणेश पूजा का विसर्जन है और फिर दिवाली एक साल बाद आएगी इसलिए अब बजा ही दो।  देखो उसने हेलोवीन वाला मास्क भी पेहेन रक्खा है। 

गाँव की दीपवाली में लगे गणेश लक्ष्मी पूजा के मंडप से अब विसर्जन को जाने का समय - गांव के बहार का दृश्य  

पास के तालाब में मूर्ति विसर्जन करने के लिए नाचते गाते हुए रवाना।  इसके उपरांत अब से दिवाली के लिए एक साल तक का धाडस बांधना पड़ेगा।


शहर की दिवाली


हावड़ा शहर की दीपावली : हुगली नदी के बांधाघाट से गंगा जल लेने के साथ करता हूँ श्री गणेश 

कुम्हार टोला जाकर दिवाली के लिए काली माता की मूर्ति का आर्डर देना है : इस मूर्ति का किसी और ने आर्डर दिया था और ये अभी पूरी नहीं हुयी थी। 

कुम्हार ने माँ काली के मूर्तियों का आर्डर लेना चालू कर दिया था पर ये भी किसी और ने पसंद कर रक्खी थी

दिवाली के लिए आर्डर दी हुयी माँ काली की एक और मूर्ति जो धुप में रंग सूखने के लिए रक्खी हुयी थी कुम्हारटोली में 

सर्बजनिन काली पूजा के लिए मोहल्ले में चंदा लेना और उसका हिसाब रखना 

चंदा काटते समय दिखी भारत की अनेकता में एकता की मिसाल : सच्चे भारतीय के घर के बहार ही आप हिन्दू धर्म और इस्लाम धर्म का चिन्ह देख पाएंगे। 

पटाखा बाजार में आँखों के सामने फुलझड़ी या अनार पटाखे बनाते हुयी ये महिला 

अनार पटाखे मुझे पसंद है इसलिए दीदी को कहा के अच्छे से बारूद का मसाला भरें और वो बेलन से थुश-थुश कर भरती हुयी 

पटाखा बेचने वाली महिला का काम सच्चा था।  अनार ने तो दिवाली की रात चार चाँद ही लगा दी थी। 
पास के मोहल्ले में थीम काली पूजा - शिवलिंग का पूजा पंडाल मंडप और उसके पीछे काली माँ की मूर्ति 

शहर की दीपावली में श्यामा काली माता की मूर्ति।  श्यामा काली भी काली माँ का ही एक रूप है जो श्याम रंग की हैं और महाकाली की तरह रूद्र भी नहीं हैं। 

एक और श्यामा काली पूजा पंडाल की मूर्ति 

श्यामा काली पूजा की विशालकाय मूर्ति 

मित्र के घर पर किये जा रहे श्यामा काली माँ की पूजा का दृश्य

शहर की दिवाली में पूजा पंडाल मंडप में किये जा रहे श्यामा काली माँ की आरती में प्रणामी देते हुए भक्तजन 

धाक और कुरकुरी की धुन पर सबकी थिरकाते हुए ढाकी वाले 

काली पूजा पंडाल और मंडप में लगी काली माता के साथी डाकिनी और योगिनी की मूर्तियां

काली माँ को चढ़ाये हुए तरल प्रसाद को ग्रहण करते हुए भक्त 

काली पूजा के भोग में खिचड़ी बनाने में अपना योगदान देते हुए

श्यामा काली पूजा का भोग तैयार है - खिचड़ी और सब्जी

भोग वितरण करते हुए काली पूजा के आयोजक मित्र गण 

दिवाली का उत्सव अब ख़त्म होने को आया।  काली पूजा भी अब विसर्जन के साथ ही एक साल का इंतज़ार देकर जाने वाला है। माँ की मूर्ति को पंडाल से बाहर गाड़ी तक पहुँचाने के बाद का दृश्य।   

बांधाघाट - हावड़ा : काली माता की मूर्ति को हुगली नदी के गंगा जल में विसर्जित करने के साथ ही अब दिवाली के दीयों को जगमाने के लिए एक साल का घोर अंतराल शुरू। 

इस ब्लॉग पोस्ट के अंत में आप सभी पाठकों को मेरा स्नेह और आदरपूर्ण शुभकामना सन्देश के आने वाली सभी दीपवाली मंगलमय हो। 

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