Skip to main content

Posts

Showing posts from October, 2015

गांघी जी के तीन गुणी बन्दर

जैसा की यह चित्र देख कर पता चल रहा है के भारत के स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त का दिन है एवं झंडा फहराने के बाद का दृश्य है। 

झंडा फहरावन के बाद हम - सभी मित्रों में देश-विदेश की बात होते-होते बात उठ गयी गांधी जी के तीन बंदरों की क्योंकि वे कोई मामूली बन्दर नहीं थे। तीनों के तीनों गुणवान थे। एक को बुरा न सुनने का गुण था। दूसरा बुरा ना देखता था और तीसरा बुरा न कहता था। कुछ ऐसी ही कहानी आपने भी कभी सुनी होगी। है ना?

पर हमारा टॉपिक ऑफ़ डिस्कशन ही कुछ अलग था। हम सभी मित्र उस दिन फ़ोटो खीचने के बाद गांधियन युग के उन बंदरों का अस्तित्व अभी के समय में खोजने लगे।

चर्चा चली - सबने अपना अपना वक्तव्यरक्खा औरनिष्कर्ष यह निकला की गांधीजी के तीनों बन्दर हमारे अंदर - हमारे समाज में अभी भी अस्तित्व रखते हैं।

पर आश्चर्य न हुआ यह जान कर की हमलोगों को इसका एहसास भी नहीं। एहसास हो भी तो कहाँ से? उनके गुणों में उनके सबसे बड़े अवगुण जो छुपे हुए हैं।


वो यह की पहला गुणी बन्दर जो बुरा सुन नहीं पाता वह फर्राटे से बुरा बोलता है और देखता है।दूसरा गुणी बन्दर जो बुरा देख नहीं पाता पर बुरा कहने और सुनने के अवगुण से परिपूर्ण है।…