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Showing posts from 2015

दावत-ए-मुर्गा --- ठंडी के दिनों में पिकनिक

बड़ा
दिन यानि 25 दिसंबर का दिन हम सभी धूम-धाम से मानते हैं और मनाते हैं। कहीं कोई केक और पेस्ट्रीज खाता है, कोई गिरजा घर जाता है, कोई सिनेमा देखने जाता है तो कई लोग पूरे परिवार के साथ सैर सपाटा करने निकल जाते हैं।

National Holiday होने की वजह से कभी-कभी हम जैसे भुक्कड़ लोगों के ग्रुप को कुछ रुचिकर और कुछ सुरुचिकर करने और कराने का मौका मिलता है। एक ऐसा भी बड़ा दिन गुजरा था कभी जब सभी मित्रों के सहयोग से कुछ खाने-पकाने पर सर्वसम्मति बनि। कड़कती ठंडी को मात देने और बड़े दिन को कुछ और बड़ा करने की सोच से लैस कई सुझाव आये पर किसी एक का चयन कर पाना कठिन हो रहा था। मुद्दा ये नहीं था के मुर्गी पके या मुर्गा..... :-)


पिकनिक करने के लिए मुद्दा तो यह था के चिकन करी के साथ चावल हो या सत्तू वाली लिट्टी।
आखिरकार मामला ठंडी में गर्मी के एहसास का था तो सत्तू से भरी हुयी और तेल में तली हुयी लिट्टी पर बात अटक रही थी पर निष्कर्ष निकला के जिन्हे पुलाव पसंद हो उनके लिए पुलाव भी बने

यह तय होते ही के मुर्गी के साथ थाली में क्या-क्या सजेगा, यह भी तय हो गया के प्रत्येक बंदे को इस एक पहर की पिकनिक में कितने रुपये देने ह…

Viewing 51 Feet Tall Lord Shiva Statue at Bangeshwar Mahadev Mandir in Howrah, Eastern India.

One of it's kind in Eastern India, this 51 feet tall Lord Shiva statue was unveiled by Honorable President Of India Shri Pranab Mukherjee on Sunday, December 13, 2015. The President along with his team and Governor of West Bengal Keshari Nath Tripathi visited the famous temple 'Natun Mandir' aka 'Naya Mandir' which means 'Newest Temple' in English, i.e, Seth Banshidhar Jalan Smriti Mandir or Bangeshwar Mahadev Mandir in Howrah early morning on Sunday. FYI, the Shiva Temple rests in between Howrah Railway Station and Salkia's Bandhaghat area exactly on Salkia School Road which is both way connected to Kolkata either by road or by river through Golabari-Armenian Ferry Service as well as Bandhaghat-Ahiritola Ferry service too. It would hardly take an hour to reach the landmark if you are connecting the nearby dots I mentioned above during peak traffic hours.




Since the inauguration was of a rarest of rare Lord Shiva statue in my city by The President Of Ind…

A Sunday Treat At Dakshineswar Temple Kolkata

It would have been a regular and lazy sunday that day which comes every weekend unless there is something special to cherish about. But thanks to my friend, let's call him 'L'; who planned to visit Dakshineswar Kali Temple in Kolkata early morning to perform pooja rituals in the temple to welcome his new motorcycle TVS Apache RTR to the family.

As we were heading towards Dakshineswar Temple from Howrah, we have already checked the normal opening and closure timings as well as aarti timings of the Kali Temple from these two reliable website sources. West Bengal Tourism, Government of West Bengal-Heritage section- Dakshineswar Temple
Official Website of Dakshineswar Kali Temple, Calcutta, now Kolkata He caught a Brahmin Pandit from the temple premises itself. One can find everything related to performing puja and rituals from the "Dala Arcade" building which is built inside the temple premises.
As soon as the pooja finished, it was time for a special sunday treat by L. …

बंदरों का आतंक

इंसान और बंदर देखने में तो काफी अलग होते हैं पर ढांचा बिलकुल एक जैसा । वही २ कान २ आँखें १ नाक और मुँह वही १०-१० उँगलियों के पंजे पर सिर्फ एक अकेली पूँछ ने सारा खेल बिगाड़ दिया। वरना वो जानवर होते हुए भी आज हम मनुष्यों के साथ पल-बढ़ रहे होते क्यूंकि बंदरों को इंसानो के साथ काम करना या यूँ कहें उनकी नक़ल उतारना बखूबी पसंद है या इंसानो को बंदरों के साथ घुलना मिलना अच्छा लगता है।
लोग बड़े चाव से मदारी का तमाशा भी देखते हैं, पैसे लुटाते हैं, बंदर को केला-फल खिलाया जाता है इत्यादि-इत्यादि! खैर वो अलग बात है के मैं इस बन्दर के बच्चे को केला देने के बजाय Hajmola Candy देने गया था, पर उल्टा कहावत यह हो गयी की
बन्दर क्या जाने CANDY का स्वाद?
2013 की ही बात कर रहा हूँ ! जल्दी से हाजमोला कैंडी मेरे हाथों से लपकते ही इसने मुझे ऊँगली में काट लिया! बस क्या, उसी दिन से मेरा बुरा होने लगा । सरकारी हस्पताल से बंदर काटने का इंजेक्शन यानि टिका लेना पड़ा । मुझे ऐसे आतंक की उम्मीद एक बन्दर के बच्चे से तो नहीं थी पर क्या करता, ठहरा तो वो जानवर ही।


बंदरों के लंगूर प्रजाति का आतंक
मज़ा तो तब आता है जब ये बन्दर बिना आक…

देशी गन्ने का जूस- अमृत से सत्कार

गर्मी का महीना, भरी दोपहरी, कड़क धुप और उसपे अगर मोटरसाइकिल से पड़ोस के गॉव में अपने किसी हितैषी से मिलने जाना हो तो भी ये चिलचिलाती गर्मी हित-मीत वाले चाल-चलन नहीं दिखलाती है।  पर हित तो हित ही होते हैं । घर के दरवाजे पर पहुंचे नहीं के चारपाई लग गयी पीपल के पेड़ के निचे। 


बाकायदा दुआ-सलाम होने के साथ-साथ बच्चों को जल्द से जल्द सेवा में अमृत पान कराने को कहा गया । बच्चे ने ईंख चिभते हुए सर हिलाया! पछुआ हूं-हूं (पश्चिम दिशा से बहनेवाली हवा) कर बह रही थी! सर से पैर तक पसीने से बुरा हाल हुए जा रहा था । तभी मोटर चलने की आवाज़ आई। 
पल भर में इंजन की आवाज़ बंद होते ही बाल्टी भर गन्ने का शीतल अमृत रूपी रस और गिलास हाज़िर था । शहरों में बिकने वाले छिले हुए गन्ने के रस की तरह चमकदार और साफ़ तो नहीं था पर गावं की मिटटी से जुड़ा ज़रा सा मठ -मैला पर स्वाद ऐसा की हलक से उतारते ही मानो जैसे मोक्ष प्राप्त हो गया हो!  भेलि और गुड़ के लिए निकले गए रस के भंडार को आग पर पकाने के साथ-साथ गन्ने के छिलके की गन्दगी तैरते हुए ऊपर आ जाती और तब उसे निकल दिया जाता है । वरना यूँही अमृत रस पीने के लिए गन्ने को छिलने की क्या ज…

गांघी जी के तीन गुणी बन्दर

जैसा की यह चित्र देख कर पता चल रहा है के भारत के स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त का दिन है एवं झंडा फहराने के बाद का दृश्य है। 

झंडा फहरावन के बाद हम - सभी मित्रों में देश-विदेश की बात होते-होते बात उठ गयी गांधी जी के तीन बंदरों की क्योंकि वे कोई मामूली बन्दर नहीं थे। तीनों के तीनों गुणवान थे। एक को बुरा न सुनने का गुण था। दूसरा बुरा ना देखता था और तीसरा बुरा न कहता था। कुछ ऐसी ही कहानी आपने भी कभी सुनी होगी। है ना?

पर हमारा टॉपिक ऑफ़ डिस्कशन ही कुछ अलग था। हम सभी मित्र उस दिन फ़ोटो खीचने के बाद गांधियन युग के उन बंदरों का अस्तित्व अभी के समय में खोजने लगे।

चर्चा चली - सबने अपना अपना वक्तव्यरक्खा औरनिष्कर्ष यह निकला की गांधीजी के तीनों बन्दर हमारे अंदर - हमारे समाज में अभी भी अस्तित्व रखते हैं।

पर आश्चर्य न हुआ यह जान कर की हमलोगों को इसका एहसास भी नहीं। एहसास हो भी तो कहाँ से? उनके गुणों में उनके सबसे बड़े अवगुण जो छुपे हुए हैं।


वो यह की पहला गुणी बन्दर जो बुरा सुन नहीं पाता वह फर्राटे से बुरा बोलता है और देखता है।दूसरा गुणी बन्दर जो बुरा देख नहीं पाता पर बुरा कहने और सुनने के अवगुण से परिपूर्ण है।…

पागलों की अपनी छोटी सी दुनिया

इस दुनिया में पागलों की कमी नहीं है! कुछ होते हैं पर दीखते नहीं और जो दीखते हैं वो होते नहीं! इन्हे न कोई रोकने वाला न कोई टोकने वाला! उनकी हरकतें ही हमें अपनी तरफ आकर्षित करती हैं इसलिए चाहते हुए भी नज़र नहीं हटती! कई दिनों से मेरा साक्छात्कार भी मानसिक रूप से पैदल लोगों से ज्यादा हो रहा है! वे आपको किसी भी जगह, किसी भी समय दिख सकते हैं! कभी कोई(पागल) मुझे कूड़े-कचरे के ढेर पर आराम से लेट कर गहन चिंता में मिला तो कभी कोई भरी गर्मी की दोपहरी में ताड़ के पत्तों का चिल्लम बना कर गांजा सुलगाते हुए मिला! यहाँ तक की रेलवे स्टेशन पर भी इनके कारनामे खुल्लम-खुल्ला होते हैं!









भूख-प्यास लगती है तो दूसरों के सामने स्वतः हाथ पसार देते हैं! इनके अंदर किंचित भी घमंड नहीं आता के दूसरों से कुछ मूह खोल कर मांगना मतलब अपनी बेइज़्ज़ती करना होता है! इन्हे ना लोक-लाज का डर ना ही कल सुबह ऑफिस जाने की जल्दी ना प्रोजेक्ट पूरा कर बॉस को देने का डेडलाइन और न ही कल के भोजन के लिए आज काम करने की जरुरत ! इन्हे समाज के काम करने के तरीके से कोई मतलब नहीं, जो भी करते हैं खुद से करते हैं भले ही ज़माना इन्हे मानसिक समझे! पर …