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Showing posts from July, 2014

Mud Fishing

Yeah you heard it right, I am talking about Mud fishing because fresh-water fishing is just too mainstream. Unlike other fishing techniques like using spears, hooks or fishnets, mud fishing is an art of your hands. Often liked by kids and amateurs, fishing is always the best rewarding time-pass one can do. It requires your enthusiasm, patience and good visibility for a stubble concentration on your subject.
This incident is of my ancestral village in Gorakhpur. It was during the month of March-April, one of the ponds got dried up due to intolerable heat from the sun and the loo carried by hot winds. Well, this might sound weird but this sort of mid-summer atmospheric pressure is quiet common in North-western states of India and Uttar Pradesh is not an exception to this. As a result of the ponds drying up fastly & the water level dropping down rapidly, the fishes come to accumulate into the muddy water of the almost dry pond. This proves to be the best time for kids and other mud-fi…

कलकत्ता का प्रसिद्द बाबा भूतनाथ मंदिर और हावड़ा निवासी भक्त

कुछ
ढूंढली यादें और कंप्यूटर में रक्खे हुए कुछ फोटो ने मेरा ध्यान आकर्षित किया! जैसे ही मैंने फोटो देखने के लिए खोला तो सहसा याद आगया के यह सारे फोटो 2012 के सावन के महीने की हैं! वह मेरा आखरी सावन था जब बाबा धाम से लौटने के बाद, आखरी सोमवार को मैं अपने दोस्तों के साथ कलकत्ता के निमतला समसान घाट स्तिथ बाबा भूतनाथ के मंदिर गया था! आखरी सावन इसलिए क्यूंकि 2013 में पिता जी के परलोक सिधारने के बाद; ना ही मैं बाबा धाम गया और ना ही सावन के महीने में भूतनाथ मंदिर! समय बीतता गया, संन् 2014 आगया और मैं फिर से उसी जगह खड़ा हूँ जहाँ मैंने खुद को छोड़ा था! आज उन्ही यादों और अनुभव को कुछ पुराने फोटो के जरिये आपके सामने ला रहा हूँ!




मैं हावडा में रहता हूँ, इसलिए बाबा के मंदिर जाने के लिए मुझे बांधाघाट लांच घाट से फेरी पकड़नी पड़ती है! इस सुभ यात्रा की शुरुआत गंगा नदी पर सफर करने से शुरू होती है!


गंगा नदी पार करने के बाद, मंदिर के सामने सटे हुए नल से हाथ-पैर धो कर फूल-पत्रिका खरीदने के उपरांत मंदिर के द्वार के सामने लगे हुए कतार में लग जाने की कार्यविधि चालू होती है! सावन के महीने में श्रद्धालुओं के हुजूम क…

Bindaas KICK -Bollywood & Tollywood mixed

O
verwhelmed by the trailers of Salman Khan's latest movie KICK starring Jacqueline Fernandez as female lead, the fandom for Sallu bhai once again rose in me. Coincidentally, my friend who is also a die hard fan of Salman Khan constructed a plan of watching KICK in a nearby local cinema hall as all the seats of Inox were full for the first day-first shows. We visited a renowned local cinema hall, let's call it "Hall-1" where KICK wasn't released. Surprised and disheartened we visited another local cinema hall named CHANDAN Cinema which is just outside Liluah Railway station, in case if you want to have a glimpse of it from the train to and fro Howrah.


Accidentally while moving towards the cinema hall, we first got the glimpse of the bigger poster of a bengali movieBINDAASstarring Dev Adhikari, Shrabanti Chatterjee & Sayantika Banerjee in lead roles. Almost on the verge of being dejected, me moved closer and then saw the poster of Salman's KICK which bought …

दर्द भरे फूलों की मीठी खुशबू

शेफाली, पारिजात, सिउली, हरसिंगार, प्राजक्ता, इत्यादि नामों से पूरे भारत में पहचाने जाने वाला इस फूल का पेड़ पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी मीठी सुंगंध के लिए माना और जाना जाता है! इसका वानस्पतिक नाम Nycthanthes arbor-tristis है, और अगर आप कभी दुर्गा पूजा में कलकत्ता पधारे हों तो आपने गौर किया होगा के पूजा मंडप और पंडालों के आस-पास; हज़ारों-लाखों लोगों की भीड़ और कई प्रकार के पकवानों की दुर्गन्ध एवं सुगंध को चीरती हुयी जो मीठी सी सुगंध आपको अपनी तरफ खिंच रही है वह इसी पारिजात के फूल की थी! 

आप लोगों में से जिसे पता ना हो उन्हें बताना चाहूंगा के 'सिउली का फूल', पश्चिम बंगाल का (offcial)सरकारी मान्यता प्राप्त फूल है! और हो भी क्यों ना, ये सिउली के फूल ही हैं जो रिहायसी इलाकों में अक्सर बाग़-बगीचों में पाये जाते हैं और इनकी खुशबू हमें दुर्गा-पूजा के निकट आने का संकेत देती हैं! जैसा के आप सभी जानते हैं के मेरा जन्म और पालन-पोषण पश्चिम बंगाल में हुआ है, इसलिए गाहे-अगाहे सिउली के फूलों की मादक सुगंध मुझे किसी न किसी मोड़ या नुक्कड़ पर मिली ही जाती है! और अब तो सोने पे सुहागा ही हो गया, जिस…

भारत का पहला ऐसा बैंक अकाउंट जो आपके फेसबुक और ट्विटर से चलता हो!

चौंकिए मत, न तो आप पगला गए हैं और न ही मैं! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ के आपने ऊपर जो शीर्षक पढ़ा वो पुर्णतः सत्य ही है! शायद ही किसीने सन् 2007 में सोचा होगा के Orkut जैसे Social Networking Website के आने से और उसके इस्तेमाल एवं प्रचलन से Online Social Networking की जो लत हमलोगों को लगेगी वो फेसबुक और ट्विटर पर आकर नहीं रुकेगी, बल्कि कुछ नया करने की होड़ में Kotak Mahindra Bank इस social media को एक ऐसा रूप देगा के आप भी दंग रह जायेंगे! अब आप Social Networking Website पर सिर्फ पोकिंग और रिट्विटिंग ही नहीं बल्कि बैंकिंग भी कर सकेंगे! जी हाँ,  Kotak Mahindra Bank आपके लिए लाये हैं Jifi, एक ऐसा अनूठा बैंक अकाउंट जो खुलता भी आपके फेसबुक अकाउंट के वजह से है और चलता भी आपकी फेसबुक और ट्विटर अकाउंट के जरिये ही है!
                               कहने को तो फेसबुक 2005 से ही सार्वजनिक हो गया था, पर अगर कल्पना की जाये के उन सालों में भारतीय मूल के लोग बैंकिंग और बैंक की सुविधाओं का कितना लाभ उठाते थे तो हमारे सामने वह छवि आजायेगी जहाँ लोगों को कोसों दूर चल कर बैंक जाना पड़ता था! मीलों दूर किसी बड़…

Black is Bold and Beautiful

Black, often symbolised as the colour of coal, darkness, mourning, death, sins, evil, brutality, witches and magic. But with the advancement in time, the world started symbolising black as the colour of secrecy, power, protest and fashion. The modern world and their thinking style has totally removed the darkness out of this colour 'Black'. Now a days, black is the colour of elegance and charm which is why it is highly used in the fashion industry across the globe.

For me, the 5 top most desired stuffs covered up elegantly by the colour black are
Black body Smartphone-I love black body smartphones, no matter whether they are glossy or matte in finish, what I want is just black. Though Indian Mobile phone market is full of vivid colours in smartphones, with varities of colours like yellow, green, blue, red and oranges,etc but my search stops just on the colour black. And this sort of demand is highly fueled by my rough and tough usage. Yes, I often drop my phone on the floor and …

मिट्टी की सुगंध

खुश्बुओं की अगर बात की जाये तो सबका अपना-अपना मतामत होता है! और ये लाज़मी भी है क्यूंकि किसीको इत्र की खुशबु अच्छी लती है तो किसीको फूलों की, किसीको अपने माँ के हाथों बनाये हुए पुआ-पकवान की खुशबु अच्छी लगती है तो किसीको अपने प्रेमी या प्रेमिका के कपड़ो से आ रही सुगंध अच्छी लगती है! और जहाँ तक सुगंध की बात है तो अगर पसंद आई तो आपके गुपचुप मन से 'वाह' जैसे शब्दों का उच्चारण भी करवा सकती है और अगर सुगंध पसंद नहीं आई तो आपके नाक को रुमाल से ढकवा भी सकती है, सब दिमाग का खेल है, जो पसंद हो -वो सुगंध, जो नापसंद-वो गंध!
 अब जब बात उठ ही चुकी है तो मैं अपने साथ हुआ एक वाक्या आपके सामने प्रस्तुत करता हूँ! बात उस समय की है जब स्कूल की गर्मी की छुट्टियों में या किसी रिश्तेदार कि शादी में मैं, माँ और पापा के साथ गांव जाया करता था! चिलचिलाती गर्मी का महीना और उत्तर पदेश की लूः भरी दोपहरी में घर से बाहर निकलना मुहाल हो जाता था! मैं छोटा बच्चा था और साथ में ज़िद्दी भी इसलिए कुछ दिनों की स्कूल की छुट्टी में लू हो या गर्मी, क्रिकेट खेलने तो आम के बगीचों में जाना ही था, आखिर गावं के दूसरे बच्चे भी …

JNK is back to blogging again!

Yes, you are right. With a gap of 676 days from my last blog post to till date I have been away from the whole blog-o-sphere. And I must say that during these 676 days I wasn't surely enjoying my life. My world flipped upside down. I lost my father during early 2013. Life became the worst when Mom also started falling sick. Very few of the so called relations stood by my side during those days. But a little support at that time was massive for me. I am obliged to them for this gesture.


Surprisingly, my blog was actively visited by readers from around the world but some sort of writer's block or laziness always prohibited me from blogging on anything new. Ironically, Blog idea's used to creep in my mind but the motivation and guts to write a new blog-post seemed to be a wastage of time. As a contrary, whenever I tried to write down something new, later I ended up moving it to drafts. Finally I found myself sitting down on a pile of drafts in my blogger profile as well into m…