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Showing posts from April, 2012

This Letter from Google India

It is a matter of last week. A friend of mine called me up and asked me whether I am free or not so that he could come to my home and use my internet and check the latest Wi-Fi device which I had bought the same week. As I was free and not having any classes that evening so I agreed and called him up.
He came after an hour or so at around 12.30pm. I was waiting for him and sitting and doing some search stuffs on Google. As soon as he entered into my room and reached upto my desk. He saw a letter lying on my Desk infront of my Personal Computer. The letter was torn envelope indicates that it is a book post from Google.

My friend looked at me. I looked at him. I didn’t know why he was looking at me. He asked me in curiosity “Kya be sala, Tujhe Google se letter aaya hai?”. I was in a state of shock that what is the matter of shock in getting a letter from Google. It is now a days a normal routine for me that once in a year I will get a book post from Google India about their product- such …

पैसे तो पेड़ पर उगते हैं!

पैसे की अगर बात की जाए तो आज के भाग दौर के दुनिया में बहोत कम है! आदमी की जीवनशैली इतनी वयस्थ हो गयी है के उसे पता भी नहीं चलता के वो पैसों के लिए भागे जा रहा है. और जब आप उससे ये बात पुच बैठेंगे के"भाई जी, कहा रेहते हैं आज कल? सिर्फ पैसों को देखने से नहीं चलेगा, कभी कभार दोस्तों को भी देख लेना चाहिए!" तब महासय का चेहरा मुरझा जाता है. वो तडके घूम कर जवाब देते हुए पाए जाते हैं और ऐसे वक्त में सबका जवाब एक जैसा ही होता है-"नहीं यार, ऐसा नहीं है!"             अमूमन हर आदमी के पास ऐसे दोस्त-यार होते ही हैं, बल्कि कुछ लोग तो खुद इसी तरह के होते हैं. पैसा चीज़ ही ऐसी है के आदमी को खुद के पीछे भागने पर मजबूर कर ही देती है! और मरता क्या न करता वाली हालत से मजबूर, हर आदमी पैसों के पीछे भागना चालू कर देता हैं.. कुछ अपना सपना पूरा करने के लिए, कुछ अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए, तो कुछ पता नहीं किस कारण पैसों के पीछे भागते हैं!             पैसा छपता तो RBI में हैं, पर इसका सञ्चालन बैंको और दुकानों के जरिये ज्यादा होता है! पर कोई और भी है जो इसके सञ्चालन में एक छोटा और …

मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

Friends, this is my second attempt to write a poetry or a कविता! The first attempt was in class 9 when I wrote a poetry for School's Annual Book. That poetry was appreciated and published. Now, its you who will decide about the fate of this one... :-)
मैं  फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ  फिर से वापस जाना चाहता हूँ  उन हसीं लम्हों को दोबारा जीना चाहता हूँ माँ के आँचल से ढका रहना चाहता हूँ ! मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !
तंग आगया हूँ इस दुनिया के लटको-झटकों से परेशां हूँ मैं अपने गर्लफ्रेंड के नखरों से, दोस्त भी आज कल खुद में वयस्थ हैं और मेरा हौसला भी अब पस्त हैं मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !
ये ज़ालिम रस्मो रिवाज़ मुझे खाए जा रहे हैं उनसे बचू तो नियम कानून में फंसे जाये जा रहे हैं बड़ा होकर जैसे मैंने पाप किया हो जैसे किसीने मुझे श्राप दिया हो , मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !
जीवन में अब कोई रस नहीं दीखता ! हर तरफ जो है वो हैं, नीरवता  दुसरो की खुशियों के लिए बहुत जी लिए हम, अब अपने लिए जीना चाहता हूँ मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

Modified into Superbike - Honda Stunner CBF 125 CC Motorcycle

Yellow in itself is a sporty color. But I needed something more from my sport looking motorcycle. I went for some customizations that weren't heavy on my pockets. And this is what I got to ride on. Presenting to you, modified marvel, my Honda Stunner CBF 125 CC Motorcycle as sporty looking superbike.




मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं! Epic Lyrics

हिंदी फिल्म - "सिलसिला " (सं. 1981)  का यह मशहूर गीत गीतकार जावेद अख्तर द्वारा उकेरा हुआ एक बेहद ही खूबसूरत गाना है! इस डुएट को श्री लता मंगेशकर और श्री अमिताभ बच्चन ने अपने आवाज़ से नवाज़ा है!
इस EPIC LYRICS ब्लॉग पोस्ट में मैं आपके साथ साँझा कर रहा हूँ, वह अमिताभ बच्चन जी के आवाज़ में गुनगुनाये हुए कुछ अल्फ़ाज़! या यु कहे के एक ऐसी शेर ओ शायरी जिसने इस गाने को मेरे दिल में उकेर दिया!
मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं तुम होती तो कैसा होता,  तुम ये केहती, तुम वो केहती तुम इस बात पे हैरां होती तुम उस बात पे कितनी हंसती? तुम होती तो ऐसा होता, तुम होती तो वैसा होता ! मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं!


ये रात है, या तुम्हारी जुल्फें खुली हुई हैं !
है चांदनी या तुम्हारी नजरों से मेरी रातें धूलि हुई हैं !
ये चाँद है या तुम्हारा कंगन
सितारें है या तुम्हारा आँचल
हवा का झोंका है या तुम्हारे बदन की खुसबू!
ये पत्तियों की है सरसराहट के तुमने चुपके से कुछ कहा है!
ये सोचता हूँ मैं कब से गुमसुम
के जब की मुझको भी यह खबर है के तुम नहीं हो, कहीं नहीं हो !
मगर ये दिल है के कह रहा है के तुम यही…

That 80 KM Journey for Dal Tadka & Roti at Sher-E-Punjab Dhaba, Kolaghat

I just had left my BPO job back in April 2009. All that I had that time was a Hero Devil Bicycle and long distance journeys to cover on that. I insisted Papa to help me in purchasing my 1st bike. I had my saved salary around 44K and asked Papa to pay me rest so that I can get one. Papa agreed with me, but I was confused with the options I was getting in the market. It was my 1st major buying decision. I had to take care of Brand, quality, Service center, color of Bike,etc. So, Finally purchased Honda Stunner after consulting with my friends and my heart, while unlistening to them who were against my decision. Because I loved my bike in the first instance when I saw one in showroom. I opted for a  different color and that too yellow.



It was September 2009,Durga Puja was way one month back. There was not anything to hang upon. Days were passing out boring. Even Sundays were not that exciting. So,one Sunday, all friends from club decided to ride along the highways and visit ' Sher-E-P…