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Creative and funny side of ERROR 404 messages we find on Internet

Normally, I used to surf internet looking for some articles to read.The process of searching on Google or other Search engines and going through the results and articles have become a normal process for internet users.
error 404 message funny
ERROR 404,expressing it through pictures

We know that each and every webpage found on internet does not have a guarantee to open when clicked upon. Some might have been postponed or some are under maintenance.That is why,websites show ERROR 404 or 502 while you try to open the URL.          These are the normal replies that you get when a website is not available on its server. But,I experienced something unique and captured a snapshot of it to post in on my Blog for you,my readers.
creative funny error 404 message

















It is not a matter of single encounter or single day.I have captured these snaps from my browser on regular intervals and they are really a funny way to express that the site is under maintenance or have been moved from that URL.
funny error 404 message stop caution downloading
ERROR 404-The Google way
But,I do think that the search engines or developers are changing their point of view to say 'No' or 'Error' to users. They are moving towards a funny way through pictures. Amazingly,though it is saying a 'No' to me but I liked the way it did. Isn't it??


Simple screenshot error 404 message dll error
Simple yet chattery Error 404 message


Creative error 404 messages online website blog forum errors
Error 404 message as shown on paper.li

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कलकत्ता का प्रसिद्द बाबा भूतनाथ मंदिर और हावड़ा निवासी भक्त

कुछ
ढूंढली यादें और कंप्यूटर में रक्खे हुए कुछ फोटो ने मेरा ध्यान आकर्षित किया! जैसे ही मैंने फोटो देखने के लिए खोला तो सहसा याद आगया के यह सारे फोटो 2012 के सावन के महीने की हैं! वह मेरा आखरी सावन था जब बाबा धाम से लौटने के बाद, आखरी सोमवार को मैं अपने दोस्तों के साथ कलकत्ता के निमतला समसान घाट स्तिथ बाबा भूतनाथ के मंदिर गया था! आखरी सावन इसलिए क्यूंकि 2013 में पिता जी के परलोक सिधारने के बाद; ना ही मैं बाबा धाम गया और ना ही सावन के महीने में भूतनाथ मंदिर! समय बीतता गया, संन् 2014 आगया और मैं फिर से उसी जगह खड़ा हूँ जहाँ मैंने खुद को छोड़ा था! आज उन्ही यादों और अनुभव को कुछ पुराने फोटो के जरिये आपके सामने ला रहा हूँ!




मैं हावडा में रहता हूँ, इसलिए बाबा के मंदिर जाने के लिए मुझे बांधाघाट लांच घाट से फेरी पकड़नी पड़ती है! इस सुभ यात्रा की शुरुआत गंगा नदी पर सफर करने से शुरू होती है!


गंगा नदी पार करने के बाद, मंदिर के सामने सटे हुए नल से हाथ-पैर धो कर फूल-पत्रिका खरीदने के उपरांत मंदिर के द्वार के सामने लगे हुए कतार में लग जाने की कार्यविधि चालू होती है! सावन के महीने में श्रद्धालुओं के हुजूम क…

Viewing 51 Feet Tall Lord Shiva Statue at Bangeshwar Mahadev Mandir in Howrah, Eastern India.

One of it's kind in Eastern India, this 51 feet tall Lord Shiva statue was unveiled by Honorable President Of India Shri Pranab Mukherjee on Sunday, December 13, 2015. The President along with his team and Governor of West Bengal Keshari Nath Tripathi visited the famous temple 'Natun Mandir' aka 'Naya Mandir' which means 'Newest Temple' in English, i.e, Seth Banshidhar Jalan Smriti Mandir or Bangeshwar Mahadev Mandir in Howrah early morning on Sunday. FYI, the Shiva Temple rests in between Howrah Railway Station and Salkia's Bandhaghat area exactly on Salkia School Road which is both way connected to Kolkata either by road or by river through Golabari-Armenian Ferry Service as well as Bandhaghat-Ahiritola Ferry service too. It would hardly take an hour to reach the landmark if you are connecting the nearby dots I mentioned above during peak traffic hours.




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कौवा काला क्यूँ होता है?

"दिन में एक बार खाओ और दो बार नहाओ" कुछ अजीब लगता है न सुनने में?  इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है जो मैंने गाँव में सुनी थी। गर्मियों का वक़्त था, ज्यादातर गांववासी दोपहर में "साधू बाबा की कुटी" पर एकत्रित होते थे। आम, बरगद और पीपल के पेड़ के छांव में बाबा की कुटी के बाहर बने चबूतरे पर सब बैठ कर गप्पबाज़ी किया करते थें। मैं भी गाँव गया था स्कूल की गर्मियों की छुट्टी में। तब मोबाइल का जमाना नहीं था और इसलिया लोगों के पास और मेरे पास भी दोपहर में टाइम-पास करने का कोई माध्यम नहीं हुआ करता था।

            पापा और चाचा, कुटी पर पहले से ही जा चुके थे और हर रोज़ की तरह, कुछ बातों और कुछ रोचक जानकारियों का आदान-प्रदान चल रहा था। मैं भी वहाँ पंहुचा तो पता चला की खाने-पिने की बात चल रही थी। गाँव के सभी बड़े लोग वहा पर मौजूद थें। सब इधर-उधर की बातें कर रहे थें और सबका मन्न भी पेड़ो की छांव में बतियाने में लगा हुआ था। तभी 60 वर्षीय  "साधू बाबा" अपने कुटी से निकलें। उनका भी मन्न उस मिटटी के बने और पुअरा (बिचाली) से ढके हुए ठन्डे "कुटी" में नहीं लग रहा था। वो …