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A Sunday Treat At Dakshineswar Temple Kolkata

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It would have been a regular and lazy sunday that day which comes every weekend unless there is something special to cherish about. But thanks to my friend, let's call him 'L'; who planned to visit Dakshineswar Kali Temple in Kolkata early morning to perform pooja rituals in the temple to welcome his new motorcycle TVS Apache RTR to the family.

Bike Pooja Vahan Vahana Puja at Dakshineswar Kali temple Mandir kolkata
Drawing Swastika Sign prior to Bike Puja
As we were heading towards Dakshineswar Temple from Howrah, we have already checked the normal opening and closure timings as well as aarti timings of the Kali Temple from these two reliable website sources.
He caught a Brahmin Pandit from the temple premises itself. One can find everything related to performing puja and rituals from the "Dala Arcade" building which is built inside the temple premises.

Dala Arcade inside famous Dakshineswar Kali Temple Kolkata
Inside Dakshineswar Kali Temple Area
As soon as the pooja finished, it was time for a special sunday treat by L. Yes of course, he bought a new bike, performed rituals at temple, thereafter it became mandatory to give treat to friends for this welcome change. So we moved into the local snacks corner within the temple premises, just at the entrance gate of the temple if you have noticed. Ordered plates of 'Hing Kachori' or 'Hing Kochuri' as you call it in bengali as it is a Bengali Dish, which was served along with sweet Chana Dal(Gram Pulse). We didn't stop there as we felt it will be stupid to not to opt for 'Lencha'; a sweet bengali dessert, which I feel is the taller brother of 'Gulab Jamun'.
 
Hing Kachori or Hing Kochuri at mishti dokan built inside Dakshineswar Kali Mondir
Hing Kachori and Chana Dal.
Note- Popular cooking ingredient 'hing(हींग)' is known as 'Asafoetida' in English.
Janak Kumar Yadav from howrah loves the special sunday treat with friends, eating Hing Kochuri inside Dakshineswar Kali Temple
Sunday Treats for a planned Sunday Treat
This way it became a sunday treat to cherish for life. I always recall this day whenever I see someone buying a new motorcycle. As it is mandatory to perform Vahan (Vehicle) Puja for newly purchased Motorcycles and Cars before going for a long ride on these vehicles. Just to bring auspiciousness to the new member in the family. And with such a nice spot like Dakshineswar Kali Temple, It is really impossible for Kolkata and Howrah residents to ignore these sacred holy places which have been worshipped for divinity and security since ages by most of the Hindus worldwide.

बंदरों का आतंक।

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इंसान
 और बंदर देखने में काफी अलग पर ढांचा बिलकुल एक जैसा । वही २ कान, २ आँखें, १ नाक और मुँह, १०-१० उँगलियों के पंजे पर एक अकेली पूँछ ने सारा खेल बिगाड़ दिया । वरना आज वो जानवर होते हुए भी मनुष्यों के साथ पल-बढ़ रहे होते क्यूंकि बंदरों को इंसानो के साथ काम करना या यूँ कहें उनकी नक़ल उतारना बखूबी पसंद है। 
तमाशा दिखाने आया मदारी,  बन्दर से करतब कराने को 
Baba Abhay holding a bad baby monkey- Year 2013

या यूँ कहें के इंसानों को बंदरों के साथ घुलना-मिलना अच्छा लगता हैं! तभी तो मदारी भी इन कपि शावकों को बचपन से ही पाल पोस कर बड़ा करना चाहता हैं । वो शायद इसलिए के बचपन से इंसानो के बीच पले-बढे होने से इन् जानवरों में मनुष्यों के प्रति एक लगाव सा हो जाता है । वो अपने मालिक के उँगलियों पर नाचने के लिए तैयार किया जाने लगता है । लोग बड़े चाव से मदारी का तमाशा भी देखते हैं, पैसे लुटाते हैं, बंदर को केला-फल खिलाया जाता है इत्यादि-इत्यादि !
खैर वो अलग बात है के मैं इस बन्दर के बच्चे को केला देने के बजाय Hajmola Candy देने गया था, पर कहावत ये हो गयी के "बन्दर क्या जाने CANDY का स्वाद"। 2013 की ही बात कर रहा हूँ ! जल्दी से हाजमोला कैंडी मेरे हाथों से लपकते ही इसने मुझे ऊँगली में काट लिया! बस क्या, उसी दिन से मेरा बुरा होने लगा । सरकारी हस्पताल से बंदर काटने का इंजेक्शन यानि टिका लेना पड़ा । मुझे ये उम्मीद एक बन्दर के बच्चे से नहीं थी पर क्या करता, ठहरा तो वो जानवर ही । 
गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर है इनका अड्डा 

मियां, कहीं साइकिल गायब करने के फ़िराक में तो नहीं हैं?
 मज़ा तो तब आता है जब ये बन्दर बिना आक्रामकता के, स्वेच्छा से करतब दिखाए। जैसे घरों की दीवारों पर कूदना, झुंड में सबके आकर्षण का कारण बनना, बड़े-बड़े पेड़ों पर लम्बी लम्बी छलांग लगाना या बिना ड्राइविंग लाइसेंस के दो पहिया वाहन की सवारी करना इत्यादि । 




        जरुरी नहीं के जो बन्दर जंगली हैं, अर्थात जिनका लालन-पोषण मनुष्यों ने नहीं किया हैं उन्हें मनुष्यों और उनके रोजमर्रा के वस्तुओं से प्यार नहीं । ज़रा, इन्हे तो देखिये । मेरे बड़े भैया ने ५ मिनट के लिए मोटरसाइकिल क्या खड़ी कर दी इन महाशय ने तो कब्ज़ा ही कर लिया । 
Driving License dikhao...

Who  let the Dogs out, Oops- I meant 'Monkey out'


घड़ियाँ बीतती जा रही है इस इंतज़ार में के हनुमान जी के कलयुगी अवतार लंगूर-Man कब मोटरसाइकिल से उतरेंगे और हमलोगों को अपनी गाडी के हैंडल लॉक में चाभी घुसाने मिलेगा । मज़ाल नहीं किसीकी जो बैठे हुए इस लंगूर को अंगूर का लालच देकर निचे उतार जाए । आखिरकार अच्छा खासा समय मोटरसाइकिल के नरम-नरम सीट पर बिताने के बाद इजाजत मिली की हम लोग अपनी गाडी लेकर वापस जा सके! 
बकवास गाडी है, आगे बढ़ती ही नहीं 

देशी गन्ने का जूस- अमृत से सत्कार

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गर्मी का महीना, भरी दोपहरी, कड़क धुप और उसपे अगर मोटरसाइकिल से पड़ोस के गॉव में अपने किसी हितैषी से मिलने जाना हो तो भी ये चिलचिलाती गर्मी हित-मीत वाले चाल-चलन नहीं दिखलाती है।  पर हित तो हित ही होते हैं । घर के दरवाजे पर पहुंचे नहीं के चारपाई लग गयी पीपल के पेड़ के निचे।  


Extracting sugarcane juice- The Desi Style
बाकायदा दुआ-सलाम होने के साथ-साथ बच्चों को जल्द से जल्द सेवा में अमृत पान कराने को कहा गया । बच्चे ने ईंख चिभते हुए सर हिलाया! पछुआ हूं-हूं (पश्चिम दिशा से बहनेवाली हवा) कर बह रही थी! सर से पैर तक पसीने से बुरा हाल हुए जा रहा था । तभी मोटर चलने की आवाज़ आई। 
Sugarcane pile all over the verandah
पल भर में इंजन की आवाज़ बंद होते ही बाल्टी भर गन्ने का शीतल अमृत रूपी रस और गिलास हाज़िर था । शहरों में बिकने वाले छिले हुए गन्ने के रस की तरह चमकदार और साफ़ तो नहीं था पर गावं की मिटटी से जुड़ा ज़रा सा मठ -मैला पर स्वाद ऐसा की हलक से उतारते ही मानो जैसे मोक्ष प्राप्त हो गया हो! 
Juicer for lump sugar
भेलि और गुड़ के लिए निकले गए रस के भंडार को आग पर पकाने के साथ-साथ गन्ने के छिलके की गन्दगी तैरते हुए ऊपर आ जाती और तब उसे निकल दिया जाता है । वरना यूँही अमृत रस पीने के लिए गन्ने को छिलने की क्या जरुरत है। आखिर स्वाद और सेहत के साथ मिटटी की खुशबू भी मिल जाये तो क्या बुरा है?
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