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Google Doodle for my Birthday-2014

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Flooded with wishes from friends & relatives over Facebook and SMS, I was overwhelmed and excited. Suddenly, I thought of googling something. And to my surprise there was a google-doodle with cakes, pastries and candles on them. I assumed that it would be for a celebrity born on 8th of August, for example- Roger Federer who was also born on the same date and month as of mine, only the difference is of birth years. But my assumption turned wrong when I curiously hovered the mouse on this doodle just to check for whom it was. As soon as I saw "Happy Birthday Janak Kumar!" while the cursor key was resting in the center of this doodle, I was taken aback. I checked it again and it wasn't for any other celebrity other than me. Thank you Google for this wonderful doodle on my birthday. You surprised me at instant.

Mud Fishing

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Yeah you heard it right, I am talking about Mud fishing because fresh-water fishing is just too mainstream. Unlike other fishing techniques like using spears, hooks or fishnets, mud fishing is an art of your hands. Often liked by kids and amateurs, fishing is always the best rewarding time-pass one can do. It requires your enthusiasm, patience and good visibility for a stubble concentration on your subject.
whole village kids are busy doing mud fishing with just hands, bare hands only, no hook required to fish
Smartphone Photography by JNK
 This incident is of my ancestral village in Gorakhpur. It was during the month of March-April, one of the ponds got dried up due to intolerable heat from the sun and the loo carried by hot winds. Well, this might sound weird but this sort of mid-summer atmospheric pressure is quiet common in North-western states of India and Uttar Pradesh is not an exception to this. As a result of the ponds drying up fastly & the water level dropping down rapidly, the fishes come to accumulate into the muddy water of the almost dry pond. This proves to be the best time for kids and other mud-fishing enthusiasts to fold up their sleeves and jump into this muddy water to catch few fishes for tonight's dinner. 
Fish caught by bare hands in mud fishing by village boy
Smartphone Photography by JNK
And to my disbelief, the outcome of mud-fishing is fruitful, atleast fruitful enough to be served as Fish fry, Fish curry or any other dish for that night's dinner. This lucky boy(see image above) along with his other mates caught up plenty of fish with his bare hands and expertise. It fascinated me as if why I wasn't grown-up in my village to do let my hands-down for mud-fishing during Indian summer. Sigh!!

कलकत्ता का प्रसिद्द बाबा भूतनाथ मंदिर और हावड़ा निवासी भक्त

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कुछ
ढूंढली यादें और कंप्यूटर में रक्खे हुए कुछ फोटो ने मेरा ध्यान आकर्षित किया! जैसे ही मैंने फोटो देखने के लिए खोला तो सहसा याद आगया के यह सारे फोटो 2012 के सावन के महीने की हैं! वह मेरा आखरी सावन था जब बाबा धाम से लौटने के बाद, आखरी सोमवार को मैं अपने दोस्तों के साथ कलकत्ता के निमतला समसान घाट स्तिथ बाबा भूतनाथ के मंदिर गया था! आखरी सावन इसलिए क्यूंकि 2013 में पिता जी के परलोक सिधारने के बाद; ना ही मैं बाबा धाम गया और ना ही सावन के महीने में भूतनाथ मंदिर! समय बीतता गया, संन् 2014 आगया और मैं फिर से उसी जगह खड़ा हूँ जहाँ मैंने खुद को छोड़ा था! आज उन्ही यादों और अनुभव को कुछ पुराने फोटो के जरिये आपके सामने ला रहा हूँ!


Lord Shiva at Bhootnath Temple-- Smartphone Photography by JNK

Bandhaghat Launch Ghat-Howrah side (Smartphone Photography by JNK)

मैं हावडा में रहता हूँ, इसलिए बाबा के मंदिर जाने के लिए मुझे बांधाघाट लांच घाट से फेरी पकड़नी पड़ती है! इस सुभ यात्रा की शुरुआत गंगा नदी पर सफर करने से शुरू होती है!

Smartphone Photography by JNK

गंगा नदी पार करने के बाद, मंदिर के सामने सटे हुए नल से हाथ-पैर धो कर फूल-पत्रिका खरीदने के उपरांत मंदिर के द्वार के सामने लगे हुए कतार में लग जाने की कार्यविधि चालू होती है! सावन के महीने में श्रद्धालुओं के हुजूम के बीच लगे हुए कतार का आखरी छोड़ भी खोज पाना बहोत मुश्किल हो जाता है, क्यूंकि यह नीमतल्ला घाट से भी आगे बड़ाबाजार के पोस्ता इलाके तक लम्बी लग जाती है!

Smartphone Photography by JNK

Smartphone Photography by JNK

शिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ अलग-अलग विषयों पर बनायीं हुयी मूर्तियां और नैतिक बातों पर आधारित झुग्गियां भी देखने को मिलता है! जैसा के ऊपर वाले चित्र में आप देख रहे होंगे के भगवान शिव-संभु अपने प्रत्येक भक्त के साथ रहते हैं, चाहे वह दर-बदर भटक कर बच्चों को गुब्बारे बेचने वाला ही क्यों ना हो!

Smartphone Photography by JNK
 जैसे जैसे आप अंदर बढ़ते जाते हैं, वैसे वैसे ही मंदिर के अंदर का दृश्य मनोरम होते जाता है! शेषनाग के छाया में बैठे अर्धनासिरवार के दर्शन से ऐसा प्रतीत होता है मानो आत्मा-परमात्मा में विलीन हो रही हो!
Image Source- Admin of  http://dharmikraj.blogspot.in/

समय का मूल्य निजी जीवन में ही नहीं, बल्कि मंदिरों में लागु होता है! अगर आप समय पर पहुंच गए तो बाबा भूतेस्वरनाथ के श्रृंगार विधि के भी साक्षी बन सकते हैं! ऐसा सौभाग्य मुझे प्राप्त हो चूका है, जानने के लिए पढ़े मेरा दूसरा ब्लॉग-पोस्ट


Smartphone Photography by JNK


 दर्शन के उपरांत आरती करने का समय हो जाता है, भक्तजन मंदिर से बाहर बने मंदिर के प्रांगण में कपूर और आरती की थाल लेकर सामने के दीवार पर अंकित मन्त्रों के उच्चारण के साथ आरती करने लगते हैं! आरती हो जाने पर, आरती की थाल में स्वेत कपूर की ज्वलनशील शुद्धता से निकले हुए कालिख का ही टिका कर लेना पड़ता है, अगर आप चाहें तो बाकि की कालिख उसी कपूर के कागज में पोंछ कर अपने हिट-मित्रों को भी टीकाकरण के लिए दे सकते हैं या अपने घर ले जा सकते हैं!
                          ज़रा ठहरिये, सिर्फ बाबा भूतनाथ के दर्शन कर वापस घर न जाएं! अभी तो मोटा-महादेव के दर्शन बाकि हैं! बाबा भूतनाथ के मंदिर के विपरीत से कलकत्ता सर्कुलर रेलवे की पटरियां गुजरती है, एक सकरी सी गली से घुसते हुए आपको रेल की पटरियां दिख जाएँगी, उन्हें पार करते है ठीक सामने माँ काली, माता जगदम्बा, और पेड़ में अंकित श्री गणेश जी के दर्शन हो जायेंगे! बस उसी मंदिर के बगल से आप मोटा-बाबा जिन्हे मोटा महादेव भी कहा जाता है उनके मंदिर जा सकते हैं!
Smartphone Photography by JNK

मोटा-महादेव का मंदिर काफी पुराना है, ऐसा आपको मंदिर की बाहरी दीवारों को देख कर ही पता चल जायेगा! उन्हें मोटा बाबा क्यों कहते हैं शायद उस विशाल शिवलिंग को देख कर ही समझ आजाता है! लोग यहाँ तक कहते हैं के मोटा-बाबा का शिवलिंग हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ते रहता हैं और जिस दिन यह शिवलिंग अपने मंदिर के गुम्बज से स्पर्श होगा, उस दिन कलयुग का अंत हो जायेगा!

Smartphone Photography by JNK

मोटा-बाबा के पूजा और दर्शन के बाद, पेड़े का प्रसाद आपस में बांटते हुए हम सभी लोग वापस अहिरीटोला से बांधाघाट के लिए लांच पकड़ कर वापस नदी के इस पार आ जाते हैं!

Bindaas KICK -Bollywood & Tollywood mixed

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O
verwhelmed by the trailers of Salman Khan's latest movie KICK starring Jacqueline Fernandez as female lead, the fandom for Sallu bhai once again rose in me. Coincidentally, my friend who is also a die hard fan of Salman Khan constructed a plan of watching KICK in a nearby local cinema hall as all the seats of Inox were full for the first day-first shows. We visited a renowned local cinema hall, let's call it "Hall-1" where KICK wasn't released. Surprised and disheartened we visited another local cinema hall named CHANDAN Cinema which is just outside Liluah Railway station, in case if you want to have a glimpse of it from the train to and fro Howrah.
Bengali movie Poster Outside Chandan Cinema Hall in Liluah

Accidentally while moving towards the cinema hall, we first got the glimpse of the bigger poster of a bengali movie BINDAAS starring Dev Adhikari, Shrabanti Chatterjee & Sayantika Banerjee in lead roles. Almost on the verge of being dejected, me moved closer and then saw the poster of Salman's KICK which bought a sigh of relief on our faces. There were plenty of chances for us to miss-out watching KICK on the first day of premiere if this cinema hall too doesn't have the movie released before this Eid. As a consequence of the festivity of Eid in 2014, Bindaas and Kick, both films were released by this cinema hall with two different shows on each movie.
 
Salman Khan's train stunt in Kick
Image Source- http://bollyspice.com
 
Last but the not the least, we entered the cinema hall on time, sat down in our respective seats there. Whistled, shouted and clapped being BINDASS with other Sallu fans while watching @BeingSalmanKhan's KICK.

In case if you can't figure out the motive or meaning behind this blogpost, I would like to narrate in pure Sallu bhai's style - "मैं दिल में आता हूँ, समझ में नहीं!"

दर्द भरे फूलों की मीठी खुशबू

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शेफाली, पारिजात, सिउली, हरसिंगार, प्राजक्ता, इत्यादि नामों से पूरे भारत में पहचाने जाने वाला इस फूल का पेड़ पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी मीठी सुंगंध के लिए माना और जाना जाता है! इसका वानस्पतिक नाम Nycthanthes arbor-tristis है, और अगर आप कभी दुर्गा पूजा में कलकत्ता पधारे हों तो आपने गौर किया होगा के पूजा मंडप और पंडालों के आस-पास; हज़ारों-लाखों लोगों की भीड़ और कई प्रकार के पकवानों की दुर्गन्ध एवं सुगंध को चीरती हुयी जो मीठी सी सुगंध आपको अपनी तरफ खिंच रही है वह इसी पारिजात के फूल की थी! 

Image Source- http://harivarasanam.wordpress.com
आप लोगों में से जिसे पता ना हो उन्हें बताना चाहूंगा के 'सिउली का फूल', पश्चिम बंगाल का (offcial)सरकारी मान्यता प्राप्त फूल है! और हो भी क्यों ना, ये सिउली के फूल ही हैं जो रिहायसी इलाकों में अक्सर बाग़-बगीचों में पाये जाते हैं और इनकी खुशबू हमें दुर्गा-पूजा के निकट आने का संकेत देती हैं! जैसा के आप सभी जानते हैं के मेरा जन्म और पालन-पोषण पश्चिम बंगाल में हुआ है, इसलिए गाहे-अगाहे सिउली के फूलों की मादक सुगंध मुझे किसी न किसी मोड़ या नुक्कड़ पर मिली ही जाती है! और अब तो सोने पे सुहागा ही हो गया, जिस नए मोहल्ले में गए हैं, हमारे घर के दरवाज़े के सामने ही सिउली का पेड़ है, और सावन का महीना खत्म होते ही, पारिजात के फूल दुर्गा-पूजा के समीप आने का संकेत देने लगते है! सुबह घर से बहार निकलते ही इसकी खुशबू आपका मन्न और चित प्रसन्न कर देती है और आपकी यात्रा भी बन जाती है! ऐसा सुगन्धित वातावरण आनेवाले 2-3 महीनो तक रहता है!
Image Source- http://www.rajrupagupta.com/
पौराणिक हिन्दू कथाओं की माने तो, समुन्द्र मंथन से ही कल्पवृक्ष अर्थार्त पारिजात के पेड़ की उत्पत्ति हुयी! इसे प्रेम और सौहार्द का प्रतिक माना गया है! कहानियां यहाँ तक कहती हैं के प्रेम लीला करने वाले भगवन श्री कृष्ण ने इन्द्र से युद्ध कर पारिजात के पेड़ को प्राप्त किया है! इसी पर, श्री कृष्ण की पहली पत्नी सत्यभामा ने इस फूल के पेड़ को खुद के कमरे से सटे हुए बगीचे में लगवाने को कहाँ, श्री कृष्ण ने भी ऐसा ही किया, परन्तु वह कुछ इसतरह के इसके फूल खिलेंगे तो सत्यभामा के बगीचे में पर गिरेंगे बगल वाले बगीचे में, जहाँ श्री कृष्णा की दूसरी पत्नी रुक्मिणी रहती थी और वो उन्हें ज्यादा प्रिय थी!! 
Smartphone Photography by JNK
विदेशों में प्रसिद्ध एक कहानी यह भी है के, पारिजात को सूर्य से प्यार था, उसने सुरज को पाने की बहुत कोशिश की पर जब उसका आमना-सामना धधकते हुए सूरज से हुआ तो वो उसकी गर्मी से भस्म हो कर राख की ढेर बन गयी, कुछ दिनों बाद उसी राख की ढेर में से सिउली यानि Night Jasmine के पेड़ का जन्म हुआ! इस पेड़ के फूलों की खासियत यह होती है की यह सुरज ढलने के बाद खिलती हैं, और सुबह का सुरज उगने के पहले दर्द भरे आंसुओं की भावना देते हुए पेड़ से झड़ कर ज़मीन पर गिर जाती है! इसतरह, हमलोग कह सकते हैं के इस फूल ने खिलने से मुरझाने तक सिर्फ और सिर्फ प्यार ही बांटा है!

भारत एवं दुनिया का पहला ऐसा बैंक अकाउंट जो आपके फेसबुक और ट्विटर से चलता हो!

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चौंकिए मत, न तो आप पगला गए हैं और न ही मैं! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ के आपने ऊपर जो शीर्षक पढ़ा वो पुर्णतः सत्य ही है! शायद ही किसीने सन् 2007 में सोचा होगा के Orkut जैसे Social Networking Website के आने से और उसके इस्तेमाल एवं प्रचलन से Online Social Networking की जो लत हमलोगों को लगेगी वो फेसबुक और ट्विटर पर आकर नहीं रुकेगी, बल्कि कुछ नया करने की होड़ में Kotak Mahindra Bank इस social media को एक ऐसा रूप देगा के आप भी दंग रह जायेंगे! अब आप Social Networking Website पर सिर्फ पोकिंग और रिट्विटिंग ही नहीं बल्कि बैंकिंग भी कर सकेंगे! जी हाँ,  Kotak Mahindra Bank आपके लिए लाये हैं Jifi, एक ऐसा अनूठा बैंक अकाउंट जो खुलता भी आपके फेसबुक अकाउंट के वजह से है और चलता भी आपकी फेसबुक और ट्विटर अकाउंट के जरिये ही है!
                               कहने को तो फेसबुक 2005 से ही सार्वजनिक हो गया था, पर अगर कल्पना की जाये के उन सालों में भारतीय मूल के लोग बैंकिंग और बैंक की सुविधाओं का कितना लाभ उठाते थे तो हमारे सामने वह छवि आजायेगी जहाँ लोगों को कोसों दूर चल कर बैंक जाना पड़ता था! मीलों दूर किसी बड़े चौराहे या नुक्कड़ पर ही इक्का-दुक्का बैंक दिखा करते थें! ऐसा दृश्य भी तभी देखने मिलता था जब आप शहरी इलाके में रहते हो, वरना गाओं में तो बैंक का नामो-निसान नहीं था और अगर था भी तो 8 -10  लाख लोगों की आबादी पर एक या मुश्किल से दो (सरकारी एवं ग्रामीण) बैंक दिख जाते थे! आलम ये था के कुछ गिने चुने (हस्ताक्षर करने वाले) लोगों को छोड़ कर, बाकि सभी लोगों के बैंक खाते में प्रत्येक लेन -देन आपके अंगूठे से ही होता था! जो अनपढ़ थे उन्हें न जमा या निकासी पर्ची भरने आता न ही पैसा गिनने, ऐसे लोगों ने बैंकिंग को भी ज्यादा तवज्जो नहीं दिया! E-statement और SMS Alert तो दूर की बात थी, तब के समय पासबुक से ही सरे काम होते थें!
                                अब समय बदल चूका है, पीढ़ी बदल चुकी है और भारत भी बदल रहा है! हम सब साक्षर है, हस्ताक्षर करना तो कक्षा 4 में ही सिख चुके थें और बैंकिंग पिता जी से सीखा! घर का पता तो सबके पास होता था, हमारा भी है, आपका भी है, पर साथ में फेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग का पता भी है!  गए दिन जब सिर्फ घर के पते पर चिट्ठी-पत्री देकर बैंक आपसे नज़दीकियां बनाती थी! आज का युग है के बैंक आपके घर के दरवाजे से नहीं बल्कि आपके कम्प्यूटर, मोबाइल फ़ोन और Social Networking Website के दरवाज़े से अंदर अाये! इंटरनेट की गति, ध्वनि के गति से भी तेज़  है, अतः, इस इंटरनेट के माध्यम से बैंक और ग्राहक को जोड़ने का अथक प्रयास आरम्भ हो चूका है!

                                ऐसे ही एक अथक प्रयास का नाम है 'जिफी' जो की एक जीरो बैलेंस चालू खाता है जिसे आप अपने ट्विटर हैंडल या फेसबुक से जोड़ कर चेक बुक मंगवाना, अकाउंट बैलेंस देखना, लेन-देन का विवरण जैसे अनेको सेवाएं ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं! शुरुआती दौड़ में सिर्फ कुछ चुनिंदा शहरों के लोग नया अकाउंट खुलवा सकते हैं! अपना खुदका नया जिफी बैंक अकाउंट खोलना भी बहोत आसान है, बस अपने फेसबुक या ईमेल की जानकारी कोटक जिफी को यहाँ (क्लिक करें) दें और अपना नया जिफी अकाउंट खोलने का निमंत्रण पाते ही एक सरल सा फॉर्म भरिये और आपका अकाउंट-नंबर बन कर तैयार हो जायेगा! फिर क्या, बैंक से लोग आपके घर पे आएंगे, उन्हें  KYC अनुसार जरुरी कागज़-पत्तर दे दीजिये और साथ में 5000 रुपये का चेक, जो की जब तक आपके कागजों का verification नहीं हो जाता तब तक के लिए ही रखना है, उसके बाद आप बैंकिंग द्वारा या ऑनलाइन खरीदारी कर पुरे 5000 भी निकाल या इस्तेमाल कर सकते हैं क्यूंकि इस जिफी अकाउंट में 25000 रुपये से कम रहने पर सूद नहीं मिलता और अगर आपके खाते में 25000 से ज्यादा की धन-राशी है तो वह स्वतः जमा खाते/Fixed deposit में जमा हो जायेगा और उसपे आपको बाजार दर के हिसाब के interest/सूद भी मिलेगा!

                                 इस आधुनिक Social चालू खाते की एक और आधुनिकता ये है के बैंक को किये गए आपके ट्वीट और कमेंट या अपने मित्रों को 'जिफी' के लिए न्योता देने पर आपको इनाम स्वरुप कुछ अंक मिलते रहेंगे, या अगर आप अपने Jifi account के जरिये रुपये का ट्रांज़ैक्शन करते हैं तो उसपे भी आपको loyalty points मिलेंगे जो की आप बाद में पॉइंट के बदले रुपये भी ले सकते हैं! ऐसा loyalty programme दीर्घकालिक/longterm समय के दृष्टिकोण से उत्साहवर्धक है! इन जमा किये हुए अंको को अपने Jifi current account वाले मित्रों के साथ आदान-प्रदान भी किया जा सकता हैं! इसकी आधुनिकता में कोई कमी न रह जाये इसलिए इसके साथ आपको मिलता है VISA Platinum Debit Card जो की आपके ATM या ऑनलाइन ट्रनैक्शन के लिए उत्कृष्ट होगा! बाकि कोई अगर कमी रह गयी हो तो आप इसका Mobile application भी अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड कर इस्तेमाल कर सकते हैं! 
                                 बस और क्या, आप घर पर हों, या ऑफिस में, सुबह हो या शाम, सोमवार हो या इतवार, अब न बैंक जाने का झमेला न पास बुक अपडेट करवाने का! बस अपना लिंक किया हुआ ट्विटर या फेसबुक खोलिए और 24x7 अपने बैंक को अपने साथ, अपने हाथ में रखिये!  ऐसा बहोत कम ही होता है के एक ही दुकान में आपको सारा सामान मिल जाये और आपको किसी दूसरे दुकान के दर्शन न करने पड़े! कुछ ऐसी ही सर्विस लेकर Jifi हमारे सामने आया हैं ,इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए https://www.kotakjifi.com/ पर लॉग-इन करिये और खुद जान जाइए इसकी अच्छाइयां!

Black is Bold and Beautiful

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Black, often symbolised as the colour of coal, darkness, mourning, death, sins, evil, brutality, witches and magic. But with the advancement in time, the world started symbolising black as the colour of secrecy, power, protest and fashion. The modern world and their thinking style has totally removed the darkness out of this colour 'Black'. Now a days, black is the colour of elegance and charm which is why it is highly used in the fashion industry across the globe.

For me, the 5 top most desired stuffs covered up elegantly by the colour black are

  • Black body Smartphone-

    I love black body smartphones, no matter whether they are glossy or matte in finish, what I want is just black. Though Indian Mobile phone market is full of vivid colours in smartphones, with varities of colours like yellow, green, blue, red and oranges,etc but my search stops just on the colour black. And this sort of demand is highly fueled by my rough and tough usage. Yes, I often drop my phone on the floor and thus I have to be sure it doesn't catch up any scratches. We all know that apart from appearing charming, black is also a colour made for longterm usage, and the relationship between me and my gadget should be comfortable enough to last lifetime.
    My Nokia E6 (Perfectly Black)

  • Wrist watch with black dial- Some find themselves comfortable viewing a white dial or multi-coloured dial in their personal wrist watch, but for me a black dial wrist watch would suffice if it is fitted with a stainless-steel hour, minute and seconds pin. Yes, the contrast created by black dial and steel pins give better visibility even in low-light(specially nights).

Yes, that black dial & stainless steel mix.

  • Black Royal Enfield Bullet- When we talk about motor-bikes, Royal Enfield Bullet is a powerful one with a high longevity ratio. And when it comes to power and longevity, black is the perfect colour to accompany this state of mind. If it is my next bike, it would be black but not yellow like my current one.
Image Source- http://royalenfield.com

    • A black pen-

      I admire black when it comes to accessories which I wear or carry with myself. One can't say that black is fully dust proof or scratch proof, but we can't underestimate it with none the less than a dust and scratch resistant colour. Black is bold and beautiful. Thus,a pen painted in black with a glossy look is an awesome companion to carry with you always. It provides a nostalgic feel when you write down on a piece of white paper with your black pen irrespective of the ink it is having in it.
    Image source- http://fakeluxurypens.wordpress.com

    • A pair of black jeans-

      What I always ignored during my school days was a pair of black jeans, I used to love blue denims. But with the growth in my maturity as well as demands, and some dressing sense creeping into me during college days propelled me to go for a pair of black jeans in my wardrobe. And to my astonishment, my wheatish colour comes to life when I dress up in a white shirt and black jeans instead of the blue ones.
                                   This is how I adore black, what is your story to tell?

    मिट्टी की सुगंध

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    खुश्बुओं की अगर बात की जाये तो सबका अपना-अपना मतामत होता है! और ये लाज़मी भी है क्यूंकि किसीको इत्र की खुशबु अच्छी लती है तो किसीको फूलों की, किसीको अपने माँ के हाथों बनाये हुए पुआ-पकवान की खुशबु अच्छी लगती है तो किसीको अपने प्रेमी या प्रेमिका के कपड़ो से आ रही सुगंध अच्छी लगती है! और जहाँ तक सुगंध की बात है तो अगर पसंद आई तो आपके गुपचुप मन से 'वाह' जैसे शब्दों का उच्चारण भी करवा सकती है और अगर सुगंध पसंद नहीं आई तो आपके नाक को रुमाल से ढकवा भी सकती है, सब दिमाग का खेल है, जो पसंद हो -वो सुगंध, जो नापसंद-वो गंध!

                     अब जब बात उठ ही चुकी है तो मैं अपने साथ हुआ एक वाक्या आपके सामने प्रस्तुत करता हूँ! बात उस समय की है जब स्कूल की गर्मी की छुट्टियों में या किसी रिश्तेदार कि शादी में मैं, माँ और पापा के साथ गांव जाया करता था! चिलचिलाती गर्मी का महीना और उत्तर पदेश की लूः भरी दोपहरी में घर से बाहर निकलना मुहाल हो जाता था! मैं छोटा बच्चा था और साथ में ज़िद्दी भी इसलिए कुछ दिनों की स्कूल की छुट्टी में लू हो या गर्मी, क्रिकेट खेलने तो आम के बगीचों में जाना ही था, आखिर गावं के दूसरे बच्चे भी खेलने आते थे उतनी गर्मी में तो भला मैं क्यों नहीं! माताजी के लाख समझाने पर के गर्मी में घूमोगे तो लू लग जायेगा और क्यूंकि मैं दूसरे शहर (कलकत्ता) से आया हूँ और वहां लू नहीं चलती इसलिए तुम्हे पता भी नहीं के लू कितना खतरनाक हो सकता है, वगैरह-वगैरह जैसी बातों को अनदेखा कर मैं सरपट आम के बगीचे की तरफ दौड़ पड़ा करता था!
                               दो-चार दिन तो आराम से खेलते और घर लौटकर माँ से डांट सुनते हुए बिता,  पर अचानक एक दिन भगवान को भी क्या सूझी और गर्मी की भरी दोपहरी में काले-काले बादल घिर आये! देखते ही देखते, वातावरण ठंडी और तेज़ हवाओं के सरसराहट से गूंज उठा, फिर कुछ समय उपरांत बादलों ने अंगड़ाई ली, मानो ऐसा प्रतीत हुआ के अंगड़ाई लेने के वजह से उनकी हड्डियों की चरमराहट से ही बिजली के तड़कने की आवाज़ आ रही हो! घर ज्यादा दूर नहीं था इसलिए मैंने भी अपने गावं के दोस्तों के साथ आम के बगीचे में ही ठहरने का सोचा, जब तक की ये काले बादल मुझे डराना बंध न कर दें!
                               अचानक ज़ोर-ज़ोर से बारिश होने लगी, मोटी-मोटी बारिश की बूंदें जब आम और पीपल के पत्तों से टकराने लगीं तो एक अलग से संगीत का एहसास होता, ऐसा लगता जैसे बिजली के तड़-तड़ाने  की आवाज़ का किसीने 'पिच और टोन' बदल दिया हो! मुसलसल, ये तेज़ बारिश सिर्फ 10 से १५ मिनट तक ही हुयी,  पर इतने ही समय में इसने अपना काम कर दिया था, मिटटी के रास्ते  कीचड़ से सन चुके थे, पत्तों पर लगी धूल बह चुकी थी! पर सबसे रोचक बदलाव यह था के अचानक ही पूरा वातावरण मिटटी की भीनी सुंगंध से महक उठा था, ऐसा प्रतीत हुआ के वह सुगंध मेरे चित्त को प्रसन्न कर गयी, और शांत सा रहने वाला मेरा मन किसी अंजानी ख़ुशी को पाकर फुले नहीं समां रहा था! अगले कुछ घंटों तक मैं जहाँ भी जाता उस सुगंध को खुद के समीप पाता और सोचता के काश ये सुगंध मैं अपनी मुट्ठी में कैद कर सकता!
                                उस दिन एहसास हुआ के जिस देश की मिटटी और पानी का हम अनाज खाते है उसमे सिर्फ अनाज उपजाने की ही छमता नहीं बल्कि उसी मिटटी और पानी के मिलन में एक ऐसा सुगंध बसा हुआ जो आपका मन मोह लेगा, पर आप उसको संजो कर अपने साथ नहीं रख सकते! पर अगर ऐसी सुगंध बिन बारिश लेने की सोच रहे हो तो किसी ईंट के भट्टे पर तस्रिफ़ लाईये, मिटटी को पानी से सानते वक़्त वही गंध आपकी यादों को तरो-ताज़ा कर देगी!

    JNK is back to blogging again!

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    Yes, you are right. With a gap of 676 days from my last blog post to till date I have been away from the whole blog-o-sphere. And I must say that during these 676 days I wasn't surely enjoying my life. My world flipped upside down. I lost my father during early 2013. Life became the worst when Mom also started falling sick. Very few of the so called relations stood by my side during those days. But a little support at that time was massive for me. I am obliged to them for this gesture.

    Image courtesy- http://infomidwife.blogspot.com
                      
    Surprisingly, my blog was actively visited by readers from around the world but some sort of writer's block or laziness always prohibited me from blogging on anything new. Ironically, Blog idea's used to creep in my mind but the motivation and guts to write a new blog-post seemed to be a wastage of time. As a contrary, whenever I tried to write down something new, later I ended up moving it to drafts. Finally I found myself sitting down on a pile of drafts in my blogger profile as well into my mind.
                       Interestingly, one thing I realised about myself that instead of distances with blogging those days, I never stopped clicking pictures from my smartphone camera, just in case if I might change my mind to blog on those photos taken back at that time. Somewhere and somehow I was always connected with the thoughts to blog during leisure time but Positive thoughts were suppressed by my mind during that negative stage of life.
     
    Frankly speaking, I missed blogging. I missed sharing my thoughts, my pain and my happiness and my loneliness with anyone during 2012-2014. And to undo the same, I am back to blogging again. स्वागत नहीं करोगे हमारा??
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