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कौवा काला क्यूँ होता है?

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"दिन में एक बार खाओ और दो बार नहाओ" कुछ अजीब लगता है न सुनने में?  इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है जो मैंने गाँव में सुनी थी। गर्मियों का वक़्त था, ज्यादातर गांववासी दोपहर में "साधू बाबा की कुटी" पर एकत्रित होते थे। आम, बरगद और पीपल के पेड़ के छांव में बाबा की कुटी के बाहर बने चबूतरे पर सब बैठ कर गप्पबाज़ी किया करते थें। मैं भी गाँव गया था स्कूल की गर्मियों की छुट्टी में। तब मोबाइल का जमाना नहीं था और इसलिया लोगों के पास और मेरे पास भी दोपहर में टाइम-पास करने का कोई माध्यम नहीं हुआ करता था।

            पापा और चाचा, कुटी पर पहले से ही जा चुके थे और हर रोज़ की तरह, कुछ बातों और कुछ रोचक जानकारियों का आदान-प्रदान चल रहा था। मैं भी वहाँ पंहुचा तो पता चला की खाने-पिने की बात चल रही थी। गाँव के सभी बड़े लोग वहा पर मौजूद थें। सब इधर-उधर की बातें कर रहे थें और सबका मन्न भी पेड़ो की छांव में बतियाने में लगा हुआ था। तभी 60 वर्षीय  "साधू बाबा" अपने कुटी से निकलें। उनका भी मन्न उस मिटटी के बने और पुअरा (बिचाली) से ढके हुए ठन्डे "कुटी" में नहीं लग रहा था। वो कई सालों से हमारे गाँव में ही रहते है और वो कुटी ही उनका घर है, भीक्छा मांग कर खाते है और बाल-ब्रह्मचारी का जीवन-यापन करते हैं। इससे ज्यादा मैं और कुछ नहीं जानता था उनके बारे में, क्यूंकि कलकत्ता से गाँव साल में सिर्फ 1 बार ही जाया करता था, वो भी गर्मियों की छुट्टी में।
             साधू बाबा के निकलते ही, सबने उन्हें नमस्कार किया और खाने-पिने के ऊपर अपनी चर्चा जारी राखी। चर्चा ख़त्म होते ही, बाबा ने सबको एक कहानी सुनाने की सूझी। सभी लोग कहानी सुनने को तैयार थी और मैं काफी ज्यादा उत्सुक।
  वो पौराणिक कहानी कुछ इस तरह है।--
            देवताओं ने जब इन्सान की रचना की तब इन्सान नासमझ था, उसे सिखाना पड़ता था। भगवन ने भी उन्हें एक अच्छी आदत सिखानी चाही। और एक कौवे को इंसानों तक अपनी बात पहुचाने का माध्यम बनाया! भगवान् ने इंसानों को ये संदेसा भेजा के " दो बार नहाओ-एक बार खाओ" ऐसा करने से मनुष्य रोग मुक्त रहेगा और उसकी उम्र लम्बी होगी।. कौवा भी भगवान से अनुमति लेकर ये सन्देश इंसानों तक पहुचने को निकल पड़ा!
               लेकिन बिच रास्ते में उसे एक चालाकी सूझी। भगवान द्वारा बताये गए सन्देश "दो बार नहाओ-एक बार खाओ" में उसे अपना कोई फ़ायदा नहीं दिख रहा था। क्यूंकि अगर मनुष्य दिन में दो बार नहाता और एक बार खाना खाता, तो किसी भी बीमारी से दूर रहेगा और जब भी दिन में एक बार खाना खाएगा तो पेट भर कर खाएगा और कौवे के लिए कोई जूठन नहीं छोडेगा। इससे कौवे की जाती पर भुखमरी की आफत आजाती।
                उसने अपने फायदे के लिए उस सन्देश को उल्टा कर दिया। अब "दो बार खाओ, एक बार नहाओ" का नारा लगाते हुए वो मनुष्यों के पास पंहुचा और सबको भगवान के नाम पर उल्टा सन्देश दे आया। इसके पीछे उसकी चालाकी ये थी के अगर मनुष्य दिन में एक बार नहाता है तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता परन्तु अगर दिन में दो बार खाना खाता है तोह वो अपनी थाली में कुछ न कुछ जरुर छोड़ेगा जो आखिर में फेक दिया जाएगा और उसे कौवे खा लेंगे।

               जब कौवे की ये कूटनीतिक चाल, भगवान को पता चला तो उन्होंने कौवों की पूरी जाती को उल्टा काम करने के लिए सफ़ेद से काला बना दिया।

Image courtesy- Google Images
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