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पैसे तो पेड़ पर उगते हैं!

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पैसे की अगर बात की जाए तो आज के भाग दौर के दुनिया में बहोत कम है! आदमी की जीवनशैली इतनी वयस्थ हो गयी है के उसे पता भी नहीं चलता के वो पैसों के लिए भागे जा रहा है. और जब आप उससे ये बात पुच बैठेंगे के "भाई जी, कहा रेहते हैं आज कल? सिर्फ पैसों को देखने से नहीं चलेगा, कभी कभार दोस्तों को भी देख लेना चाहिए!" तब महासय का चेहरा मुरझा जाता है. वो तडके घूम कर जवाब देते हुए पाए जाते हैं और ऐसे वक्त में सबका जवाब एक जैसा ही होता है- "नहीं यार, ऐसा नहीं है!"
            अमूमन हर आदमी के पास ऐसे दोस्त-यार होते ही हैं, बल्कि कुछ लोग तो खुद इसी तरह के होते हैं. पैसा चीज़ ही ऐसी है के आदमी को खुद के पीछे भागने पर मजबूर कर ही देती है! और मरता क्या न करता वाली हालत से मजबूर, हर आदमी पैसों के पीछे भागना चालू कर देता हैं.. कुछ अपना सपना पूरा करने के लिए, कुछ अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए, तो कुछ पता नहीं किस कारण पैसों के पीछे भागते हैं!
            पैसा छपता तो RBI में हैं, पर इसका सञ्चालन बैंको और दुकानों के जरिये ज्यादा होता है! पर कोई और भी है जो इसके सञ्चालन में एक छोटा और अहम किरदार निभाता है और वो है ‘पैसे उधार देने वाले लोग’ वो कोई भी हो सकता है, वो एक आम आदमी हो सकता है, आपका दोस्त-यार हो सकता है, आपके ऑफिस का कोलीग भी हो सकता है, आपके रिश्तेदार भी हो सकते हैं या आपके आस-पड़ोस में रहने वाला कोई भी हो सकता है!
चाहे वो जो कोई भी हो पर ऐन्मौके पे आपके पैसों की जरुरत को पूरा करने वाला किसी धन कुबेर देवता से कम नहीं होता! आपके घर में शादी है और पैसे कम पड़ गए हो, या आपको नय ज़मीन लेना हो, या मकान बनवाना हो, किसी की तबियत खराब हुई हो या अकस्मात कोई आपदा आ गयी हो, या भले हे आपकी बीवी को 5वां बच्चा होने वाला हो, आपको पता है के ऐसे धन कुबेर देवता कहा और किस किस वक्त मिलेंगे! आप तुरंत उनके पास पहुचते है, उनसे अपना दुख बताते है, उनसे उनका हाल चाल भी पूछ लेते हैं और साथ ही साथ अपना दुखरा भी सुना देते हैं! ये देखने के लिए के कही वो खुद ही अपने किसी दुख या आपदा में न फसा हो! वरना पैसे कैसे मिलेंगे! फिर आप उनके और वो आपके आँखों में देखने लगते हैं. 
Image Courtesy- www.moneytree1000.yolasite.com
आखिरकार उपरवाले ने आपकी सुन ली, आपको थोड़ा बहोत जितना हुआ  उस ‘धन कुबेर देवता’ को जितना लगा उसने दिया. हाँ, भले ही उसने आपके पुरे डिमांड को पूरा ना किया हो पर उसने यथासंभव आपकी मदद करने की कोसिस की, है की नहीं? 
आप भी उसे सुक्रिया अदा कर, "पैसे कुछ दिनों में वापस कर दूंगा" ऐसा कह कर अपने काम पे चले गए! आपका काम रुका नहीं और आप दिन दुगनी रात चौगुनी तर्रक्की करने लगें! सायद, वह आखरी दिन था जब आपने किसी के सामने पैसों के लिए गिर्गिराया होगा! कुछ हे सालों में आपके भी दिन सवर गयें! प्रसन्नता ने आपको चारो तरफ से घेर लिया! अपनी इतने बारे आदमी हो गयें हैं के आप सब अब झुक कर सलाम ठोकते हैं! आप "बबुसाहेब" हो गयें हैं!
कई सालों बाद जब वो आदमी आपके घर आपसे पैसे मांगने जाता है क्यूंकि अब वो बुड्ढा और रिटायर्ड हो चूका है! उसका बेटा अभी पढ़ रहा है, उसके कमाने का तो कोई सवाल ही नहीं होता! वह अपनी पेंसन से काम चला रहे हैं! फिर भी आपको उन्हें 1 महीने बाद बुलाने को दिल करता है! चलो, ठीक है, कोई बात नहीं, बस एक महीने ही तो उन्हें प्रतीक्षा करा रहा हैं!
एक महिना बीत गया, वो उसी दिन किसी तरह अपने ब्रिद्धावस्था में आपसे मिलने आपके घर आयें! पता चला के आप तो किसी काम से बहार गयें है और रात होते-होते आएँगे! और अगर आपसे मिलना हुआ तो कल सुबह फिर किसी तरह आना हुआ! वे वापस लौट गयें!
सुबह हुयी, एक दिन की सुरुआत इस सोच करते हुए भूतपूर्व धन कुबेर देवता ने सोचा के चलो, आज लगता हैं पैसे मिल जाएँगे! वो फिर किसी तरह अपने ब्रिद्धावस्था का ज्ञान कराते हुए आपके पास पहुंचे! आपने भी बड़े आदर-सत्कार से उन्हें बैठाया!
फिर आपने उन्हें बताया की आप कल किस काम गयें थे! पता यूँ चला के यहाँ तो आप रोने-गाने लग रहे है के आपके पास अभी पैसे नहीं हैं, आप भी किसी मुसीबत में फसें हुए हैं!  अगले महीने तक दे देंगे! दिन की सुरुआत सोच से कभी नहीं हो सकती इसका आभास सायद भूतपूर्व धन कुबेर देवता जी को हो चूका था! वे फिर मूह लटकाए आपके आँखों में सत्यता धुन्दते हुए, नमस्ते करके चले गयें!
फिर अगले महीने, आपसे मिलने का दिन आया! भूतपूर्व धन कुबेर देवता जी ने इस बार लेकिन दिन की सुरुआत किसी प्रकार की सोच के साथ नहीं की, क्यूंकि एक बार धक्का खाने के बाद सायद ही कोई भूलता हो! पैसा ऐसी चीज़ है! आपके घर पहुच कर देखा तो फिर वही हाल हैं! आप इस बार बहार कही घूमने गयें है और आपसे अगर मिलना हुआ तो कल सुबह नहीं, अगले सतह के सोमवार को आना परेगा, जो की अभी 10 दिन बाकि है! लो हो गयी दिन की सुरुआत!
सोमवार को आपसे मुलाकात हुयी तो आपने एक-दो महीने बाद का तारीख दिया और कहा के बहार जिस काम पर आप पुरे परिवार के साथ गयें थे, उस काम में सरे पैसे खर्च हो गयें! अरे बबुसाहेब, खुल कर कह दीजिये के आपके पास तो पैसे थे ही नहीं और आपको आपके पूरे परिवार के साथ बहोत हे जरुरी काम से जान पड़ गया! आप कहीं घुमने थोड़े ही गए थें! 
भूतपूर्व धन कुबेर देवता जी  भी थक हार कर दो महीने बाद आपके घर जाते हैं! पता चला के फिर किसी जरुरी काम से बहार गयें हैं! आपसे मिलना हुआ तो..........................

Note- जी हाँ, ऐसे भी लोग होतें हैं! इसलिए कभी किसी की मदद करें तो उनसे वापस में कुछ न चाहें! भूल जाइये के आपने मदद की थी और इसमें आपका पैसा लगा था! अजी, पैसा तो दूर की बात है, आपके एहसान को भूल जाने वाले लोग होतें हैं! अच्छे लोग बहोत कम मिलते हैं, उनका फायदा मत उठाइए! 
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