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मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

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Friends, this is my second attempt to write a poetry or a कविता! The first attempt was in class 9 when I wrote a poetry for School's Annual Book. That poetry was appreciated and published. Now, its you who will decide about the fate of this one... :-)

मैं  फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ 
फिर से वापस जाना चाहता हूँ 
उन हसीं लम्हों को दोबारा जीना चाहता हूँ
माँ के आँचल से ढका रहना चाहता हूँ !
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

तंग आगया हूँ इस दुनिया के लटको-झटकों से
परेशां हूँ मैं अपने गर्लफ्रेंड के नखरों से,
दोस्त भी आज कल खुद में वयस्थ हैं
और मेरा हौसला भी अब पस्त हैं
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

ये ज़ालिम रस्मो रिवाज़ मुझे खाए जा रहे हैं
उनसे बचू तो नियम कानून में फंसे जाये जा रहे हैं
बड़ा होकर जैसे मैंने पाप किया हो
जैसे किसीने मुझे श्राप दिया हो ,
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

जीवन में अब कोई रस नहीं दीखता !
हर तरफ जो है वो हैं, नीरवता 
दुसरो की खुशियों के लिए बहुत जी लिए हम,
अब अपने लिए जीना चाहता हूँ
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !


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