Recent Trend

This Letter from Google India

4
4
It is a matter of last week. A friend of mine called me up and asked me whether I am free or not so that he could come to my home and use my internet and check the latest Wi-Fi device which I had bought the same week. As I was free and not having any classes that evening so I agreed and called him up.
                                He came after an hour or so at around 12.30pm. I was waiting for him and sitting and doing some search stuffs on Google. As soon as he entered into my room and reached upto my desk. He saw a letter lying on my Desk infront of my Personal Computer. The letter was torn envelope indicates that it is a book post from Google.

Letter from google india
Letter from Google
                                
                                My friend looked at me. I looked at him. I didn’t know why he was looking at me. He asked me in curiosity “Kya be sala, Tujhe Google se letter aaya hai?”. I was in a state of shock that what is the matter of shock in getting a letter from Google. It is now a days a normal routine for me that once in a year I will get a book post from Google India about their product- such as AdWords or Adsense.
                               I  instantly replied to my friend- “Isme nayi baat kya hai, mera khud ka Google ka Email ID bhi hai!” and I started giigling from inside. My friend looked at my face with an astonished look for the next few moments and the shouted loudly saying "Abey, Google ka Email ID to mera bhi hai!" After his such late and louder reaction I started laughing more loudly and started calling him 'Tubelight', as his response time taken was like old choked Tubelights.
                                His curiosity still did not end. He kept asking me about that 'Letter from Google'. He was so curious to know about its secret that he might would have welcomed to become my disciple. Later, cooling down his curiosity with a glass of water and some sweets I told him the reason. I told him that I am a user of Google and most of its products, for example- from Adwords, Blogger, Android, Chrome, Analytics, Web Master Tools, etc.
                               And like him someday I was also shocked and astonished while I returned for home from some tution classes or some sort of work and found that I have received a "Letter from Google". I was in a sheer shock and excitement as to what is in the letter. When I opened it and found that the letter has some coupons for using a new Google Product-AdWords, My Sheer joy and excitement broke on the same moment when firstime, I saw it was a coupon inside. The same happened with my friend who expected a Job Letter inside the "Letter from Google" for me.

पैसे तो पेड़ पर उगते हैं!

2
2
पैसे की अगर बात की जाए तो आज के भाग दौर के दुनिया में बहोत कम है! आदमी की जीवनशैली इतनी वयस्थ हो गयी है के उसे पता भी नहीं चलता के वो पैसों के लिए भागे जा रहा है. और जब आप उससे ये बात पुच बैठेंगे के "भाई जी, कहा रेहते हैं आज कल? सिर्फ पैसों को देखने से नहीं चलेगा, कभी कभार दोस्तों को भी देख लेना चाहिए!" तब महासय का चेहरा मुरझा जाता है. वो तडके घूम कर जवाब देते हुए पाए जाते हैं और ऐसे वक्त में सबका जवाब एक जैसा ही होता है- "नहीं यार, ऐसा नहीं है!"
            अमूमन हर आदमी के पास ऐसे दोस्त-यार होते ही हैं, बल्कि कुछ लोग तो खुद इसी तरह के होते हैं. पैसा चीज़ ही ऐसी है के आदमी को खुद के पीछे भागने पर मजबूर कर ही देती है! और मरता क्या न करता वाली हालत से मजबूर, हर आदमी पैसों के पीछे भागना चालू कर देता हैं.. कुछ अपना सपना पूरा करने के लिए, कुछ अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए, तो कुछ पता नहीं किस कारण पैसों के पीछे भागते हैं!
            पैसा छपता तो RBI में हैं, पर इसका सञ्चालन बैंको और दुकानों के जरिये ज्यादा होता है! पर कोई और भी है जो इसके सञ्चालन में एक छोटा और अहम किरदार निभाता है और वो है ‘पैसे उधार देने वाले लोग’ वो कोई भी हो सकता है, वो एक आम आदमी हो सकता है, आपका दोस्त-यार हो सकता है, आपके ऑफिस का कोलीग भी हो सकता है, आपके रिश्तेदार भी हो सकते हैं या आपके आस-पड़ोस में रहने वाला कोई भी हो सकता है!
चाहे वो जो कोई भी हो पर ऐन्मौके पे आपके पैसों की जरुरत को पूरा करने वाला किसी धन कुबेर देवता से कम नहीं होता! आपके घर में शादी है और पैसे कम पड़ गए हो, या आपको नय ज़मीन लेना हो, या मकान बनवाना हो, किसी की तबियत खराब हुई हो या अकस्मात कोई आपदा आ गयी हो, या भले हे आपकी बीवी को 5वां बच्चा होने वाला हो, आपको पता है के ऐसे धन कुबेर देवता कहा और किस किस वक्त मिलेंगे! आप तुरंत उनके पास पहुचते है, उनसे अपना दुख बताते है, उनसे उनका हाल चाल भी पूछ लेते हैं और साथ ही साथ अपना दुखरा भी सुना देते हैं! ये देखने के लिए के कही वो खुद ही अपने किसी दुख या आपदा में न फसा हो! वरना पैसे कैसे मिलेंगे! फिर आप उनके और वो आपके आँखों में देखने लगते हैं. 
Image Courtesy- www.moneytree1000.yolasite.com
आखिरकार उपरवाले ने आपकी सुन ली, आपको थोड़ा बहोत जितना हुआ  उस ‘धन कुबेर देवता’ को जितना लगा उसने दिया. हाँ, भले ही उसने आपके पुरे डिमांड को पूरा ना किया हो पर उसने यथासंभव आपकी मदद करने की कोसिस की, है की नहीं? 
आप भी उसे सुक्रिया अदा कर, "पैसे कुछ दिनों में वापस कर दूंगा" ऐसा कह कर अपने काम पे चले गए! आपका काम रुका नहीं और आप दिन दुगनी रात चौगुनी तर्रक्की करने लगें! सायद, वह आखरी दिन था जब आपने किसी के सामने पैसों के लिए गिर्गिराया होगा! कुछ हे सालों में आपके भी दिन सवर गयें! प्रसन्नता ने आपको चारो तरफ से घेर लिया! अपनी इतने बारे आदमी हो गयें हैं के आप सब अब झुक कर सलाम ठोकते हैं! आप "बबुसाहेब" हो गयें हैं!
कई सालों बाद जब वो आदमी आपके घर आपसे पैसे मांगने जाता है क्यूंकि अब वो बुड्ढा और रिटायर्ड हो चूका है! उसका बेटा अभी पढ़ रहा है, उसके कमाने का तो कोई सवाल ही नहीं होता! वह अपनी पेंसन से काम चला रहे हैं! फिर भी आपको उन्हें 1 महीने बाद बुलाने को दिल करता है! चलो, ठीक है, कोई बात नहीं, बस एक महीने ही तो उन्हें प्रतीक्षा करा रहा हैं!
एक महिना बीत गया, वो उसी दिन किसी तरह अपने ब्रिद्धावस्था में आपसे मिलने आपके घर आयें! पता चला के आप तो किसी काम से बहार गयें है और रात होते-होते आएँगे! और अगर आपसे मिलना हुआ तो कल सुबह फिर किसी तरह आना हुआ! वे वापस लौट गयें!
सुबह हुयी, एक दिन की सुरुआत इस सोच करते हुए भूतपूर्व धन कुबेर देवता ने सोचा के चलो, आज लगता हैं पैसे मिल जाएँगे! वो फिर किसी तरह अपने ब्रिद्धावस्था का ज्ञान कराते हुए आपके पास पहुंचे! आपने भी बड़े आदर-सत्कार से उन्हें बैठाया!
फिर आपने उन्हें बताया की आप कल किस काम गयें थे! पता यूँ चला के यहाँ तो आप रोने-गाने लग रहे है के आपके पास अभी पैसे नहीं हैं, आप भी किसी मुसीबत में फसें हुए हैं!  अगले महीने तक दे देंगे! दिन की सुरुआत सोच से कभी नहीं हो सकती इसका आभास सायद भूतपूर्व धन कुबेर देवता जी को हो चूका था! वे फिर मूह लटकाए आपके आँखों में सत्यता धुन्दते हुए, नमस्ते करके चले गयें!
फिर अगले महीने, आपसे मिलने का दिन आया! भूतपूर्व धन कुबेर देवता जी ने इस बार लेकिन दिन की सुरुआत किसी प्रकार की सोच के साथ नहीं की, क्यूंकि एक बार धक्का खाने के बाद सायद ही कोई भूलता हो! पैसा ऐसी चीज़ है! आपके घर पहुच कर देखा तो फिर वही हाल हैं! आप इस बार बहार कही घूमने गयें है और आपसे अगर मिलना हुआ तो कल सुबह नहीं, अगले सतह के सोमवार को आना परेगा, जो की अभी 10 दिन बाकि है! लो हो गयी दिन की सुरुआत!
सोमवार को आपसे मुलाकात हुयी तो आपने एक-दो महीने बाद का तारीख दिया और कहा के बहार जिस काम पर आप पुरे परिवार के साथ गयें थे, उस काम में सरे पैसे खर्च हो गयें! अरे बबुसाहेब, खुल कर कह दीजिये के आपके पास तो पैसे थे ही नहीं और आपको आपके पूरे परिवार के साथ बहोत हे जरुरी काम से जान पड़ गया! आप कहीं घुमने थोड़े ही गए थें! 
भूतपूर्व धन कुबेर देवता जी  भी थक हार कर दो महीने बाद आपके घर जाते हैं! पता चला के फिर किसी जरुरी काम से बहार गयें हैं! आपसे मिलना हुआ तो..........................

Note- जी हाँ, ऐसे भी लोग होतें हैं! इसलिए कभी किसी की मदद करें तो उनसे वापस में कुछ न चाहें! भूल जाइये के आपने मदद की थी और इसमें आपका पैसा लगा था! अजी, पैसा तो दूर की बात है, आपके एहसान को भूल जाने वाले लोग होतें हैं! अच्छे लोग बहोत कम मिलते हैं, उनका फायदा मत उठाइए! 

मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

0
0
Friends, this is my second attempt to write a poetry or a कविता! The first attempt was in class 9 when I wrote a poetry for School's Annual Book. That poetry was appreciated and published. Now, its you who will decide about the fate of this one... :-)

मैं  फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ 
फिर से वापस जाना चाहता हूँ 
उन हसीं लम्हों को दोबारा जीना चाहता हूँ
माँ के आँचल से ढका रहना चाहता हूँ !
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

तंग आगया हूँ इस दुनिया के लटको-झटकों से
परेशां हूँ मैं अपने गर्लफ्रेंड के नखरों से,
दोस्त भी आज कल खुद में वयस्थ हैं
और मेरा हौसला भी अब पस्त हैं
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

ये ज़ालिम रस्मो रिवाज़ मुझे खाए जा रहे हैं
उनसे बचू तो नियम कानून में फंसे जाये जा रहे हैं
बड़ा होकर जैसे मैंने पाप किया हो
जैसे किसीने मुझे श्राप दिया हो ,
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

जीवन में अब कोई रस नहीं दीखता !
हर तरफ जो है वो हैं, नीरवता 
दुसरो की खुशियों के लिए बहुत जी लिए हम,
अब अपने लिए जीना चाहता हूँ
मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !


मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं! Epic Lyrics

1
1

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं ! के तुम होती तो कैसा होता, तुम ये केहती, तुम वो केहती तुम इस बात पे हैरां होती, तुम उस बात पे कितनी हंसती ! तुम होती तो ऐसा होता, तुम होती तो वैसा होता ! मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं! ये रात है, या तुम्हारी जुल्फें खुली हुई हैं ! है चांदनी या तुम्हारी नजरों से मेरी रातें धूलि हुई हैं ! ये चाँद है या तुम्हारा कंगन सितारें है या तुम्हारा आँचल हवा का झोंका है या तुम्हारे बदन की खुसबू ! ये पत्तियों की है सरसराहट के तुमने चुपके से कुछ कहा है ! ये सोचता हूँ मैं कब से गुमसुम के जब की मुझको भी यह खबर है के तुम नहीं हो, कहीं नहीं हो ! मगर ये दिल है के कह रहा है के तुम यहीं हो , यहीं कहीं हो !


मजबूर यह हालात, इधर भी है उधर भी 
तन्हाई की एक रात, इधर भी है उधर भी !
केहने को बहोत कुछ है, मगर किस्से कहें हम !
कब तक यूँही खामोश रहें और सहें हम !
दिल कहता है दुनिया की हर एक रस्म उठा दें !
दीवार जो हम दोनों में है, आज गिरा दें 
क्यों दिल में सुलगते रहे, लोगों को बता दें !
हाँ हमको मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत !! 
अब दिल में यही बात, इधर भी है, उधर भी !

That 80 KM Journey for Dal Tadka & Roti at Sher-E-Punjab Dhaba, Kolaghat

7
7
I just had left my BPO job back in April 2009. All that I had that time was a Hero Devil Bicycle and long distance journeys to cover on that. I insisted Papa to help me in purchasing my 1st bike. I had my saved salary around 44K and asked  Papa to pay me rest, so that I can get one. Papa agreed with me, but I was confused with the options I was getting in market. It was my 1st major buying decision. I had to take care of Brand, quality, Service centre, color of Bike,etc. So,Finally purchased Honda Stunner after consulting with my friends and my heart, while unlistening to them who were against my decision. Because I loved my bike in the first instance when I saw one in showroom. I opted for a diiferent color and that too yellow.
My modified yellow honda stunner cbf 125 kick start+self start with disc brakes 2009 model

It was September 2009,Durga Puja was way one month back. There was not anything to hang upon. Days were passing out boring. Even Sundays were not that exciting. So,one Sunday, all friends from club decided to ride along the highways and visit ' Sher-E-Punjab Dhaba' which is on the highways on the way to Digha,one of my friend Bappa told us. It is a well known dhaba cum restaurant and very famous among Kolkatans as it is on the way to Digha from Kolkata.


             I din't knew much about how to go there but I knew only one thing that if I will go there,I will get that special Tarka-Roti and that too on a Dhaba like style on either a 'Khaat' or 'Wooden Palang'. None of us were aware of the location as we visited there only when we went to Digha for any vacations and that too by car.

             Going there by Bike was not so easy. We were excited, but din't knew the path, din't knew how longer will it take there to reach, din't knew how many Kilometres away is it from home, din't knew about the Highways and people around it. The person who suggested, Bappa, he even din't even knew anything more than us. Neither anyone among all 20 boys were yelling their heads positively.. Later He said- 'Chal na yaar,dekha jayega!'

My modified yellow honda stunner cbf 125 kick start+self start with disc brakes
My Bike-My Passion
 
Everybody was ready but looking in each others eyes and asking silently whether to move ahead or not. Chotu aka Nachaniya (as he is a good dancer,just nicknamed it) said in reply to Bappa- "Sab ghar pe phone kar do ke aaj Bappa ka janmdin hai,aney me time lagega!"

            All of a sudden, all us took our mobiles and called back home saying the same as suggested by Chottu like we were ready for it and was just waiting for somebody's support. It was 12.15pm. We took our bike, went towards the National Highways NH6 and rode away towards the direction where Bappa was going.

            10 bikes and 20 boys were on the way to 'Sher-E-Punjab Dhaba'. As we all know, where there is bike and bikers there will be racking kind of stuffs and that small race of being ahead,etc. We were moving slowly following Bappa and he was riding like someone is chasing him. My bike was just 3 months old and have not gone through the 4th servicing. Thus, I was not taking risk to race with it as there were chances of burning my Bike's Clutch plate. As a result,none of our friends treied to catch him up and he then has to stop a KM or two away. Waits there till we reach there.  Again,tooks his Bajaj Pulsar and rides away. We, on the contrary were enjoying the ride on Highway with the minimun safe speed.

           After crossing 25 odd kilometres and moving far away from home,we realized that we should ask someone how long is the this dhaba to reach. We haulted at Baksara,asked a passerby and was stunned to listen to him. He said- 'Bhaijaan,abhi bhi 2-3 ghanta lagega'. We were in a state of chaos,some were telling to return back as it is already 1.30 pm and there is still 2-3 hours journey left for that mere Tarka-Roti. Some suggested to get back to another nearby dhaba and have supper there if anyone wants to.

           And some were busy in laughing and enjoying the situation and criticizing Bappa for his idea. The chaos ended after we decided to move forward inspite of the long journey. My speech played a vital role in setting down the choas. I said to them- "Jo hua so hua,bhul jao. Itne dur agaye ho to agaye ki taraf chalte hain. Humlog paidal thore he hain....Hum log Bike pe hain...aaram se ghar pahuch jaenge"

           But I didn't knew that my words will be painfull for someone else. After half an hour, Bappa's Bike Broke down due to heat, followed by Lucky's Bike which drank up petrol like nothing. We got a break, stood aside on Highways. Lit up a fag, waited for others to come who moved ahead in a hurry. There was not a Petrol pump for the next 10 Kilometres. Yes, we were far away from Kolkata and it was a rural area. Someone bought a local mineral water bottle, we all emptied it and then he and Lucky drove ahead in search of Petrol.

            After a hault of 30 minutes, we started our journey and this time everybody was moving slowly as they have learnt lesson. While in all this we din't have seen the time.It was 4pm. In curiosity we asked passerby the same question that we asked the last one. His reply was heartedly accepted as he said that the Dhaba is just 30 mintutes away. What a sigh of relief we got! We were at Dhulagarh which is near Haldia, West Bengal's Industrial belt.

          We never imagined that we will go to Haldia anyday, that to on Bike. The roads were damaged and under construction. Being an industrial belt, Trucks and heavy carriage vehicles were wrestling with the roads.  What we noticed ahead was a massive road jam. We were filled with negative thoughts of what to do, move ahead or not. Thinking of our bikes, and being confident we moved ahead. Wrestled with the massive Road-Jam & protests from local people as some Truck has hit some Bike-wallah, who died on spot. Somehow managed to move ahead crossing those small ways between vehicles in the Jam.

           Finally we reached 'Sher-E-Punjab Dhaba' at Kolaghat near Digha and it was a tiresome journey followed by some rest and gossip outside the Dhaba. It was 6 pm,it took us 6 hours to reach there and 80 Kilometres one way journey.
           
eating dal tadka and roti at sher_e_punjab hotel kolaghat
            Yes,it may seem foolish and idiotic to do this it sort of journey for Tarka-Roti. But being a foodie and adventurer, it was an awesome experience afterall.
            But,after that 2009's programe,no one dared to accompany me or go there only on bike. Seems like they have either become responsible or learnt a lesson. Last, but not the least, it took 5 hours for us to return back home and we reached home at 1am. We also enjoyed in return journey driving bike at night on NH6, but that is a different story.

            Now, Only thing I can say is "Bike hai toh Life hai" Always saath deti hai.
           What is your adventure story?


Powered by Blogger.